Unemployment increased among youth: एक तरफ जहाँ केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह हजारों युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटे, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) की हालिया रिपोर्ट चिंताजनक तस्वीर पेश करती है. नवीन मासिक आवधिक श्रम बल सर्वे (पीएलएफएस) के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में युवाओं की बेरोजगारी दर जून में तेज़ी से बढ़ी है, जो मई के 17.9 प्रतिशत से बढ़कर 18.8 प्रतिशत हो गई है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह दर मामूली रूप से बढ़ी है, मई के 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 13.8 प्रतिशत पर पहुँच गई है.
एनएसओ की कार्यप्रणाली और बेरोजगारी की परिभाषा
एनएसओ साप्ताहिक स्थिति (CWS) के आधार पर बेरोजगारी दर का आकलन करता है. इसके तहत, सर्वेक्षण की तारीख से सात दिनों की अवधि में किसी व्यक्ति की गतिविधि की स्थिति निर्धारित की जाती है. किसी व्यक्ति को उस एक हफ्ते में तब बेरोजगार माना जाता है जब वह कम से कम एक घंटे या किसी एक दिन काम करना चाहता हो, लेकिन उसे उस सप्ताह में एक घंटे या किसी भी दिन कोई काम न मिला हो.
श्रम बल भागीदारी दर में गिरावट
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि युवाओं में श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में गिरावट आई है. एलएफपीआर उन युवाओं की संख्या का आकलन करती है जो काम करने के इच्छुक हैं या काम की तलाश कर रहे हैं. जून में यह दर गिरकर 41 प्रतिशत हो गई, जबकि मई में यह 42.1 प्रतिशत थी. यह दर्शाता है कि न केवल बेरोजगारी बढ़ रही है, बल्कि काम की तलाश करने वाले युवाओं की संख्या में भी कमी आई है.