माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान 15851 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (कळउ) धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 29 फीसदी अधिक है। हालांकि, इस अवधि में फर्जी कंपनियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस तिमाही में केंद्रीय और राज्य जीएसटी अधिकारियों ने कुल 3558 फर्जी कंपनियों का पता लगाया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में यह संख्या 3840 थी। अधिकारियों ने बताया कि हर महीने औसतन 1200 फर्जी कंपनियों का भंडाफोड़ किया गया। यह गिरावट संकेत देती है कि फर्जी पंजीकरण के खिलाफ चलाया गया अभियान असरदार साबित हो रहा है। इस तिमाही में की गई कार्रवाई के दौरान 53 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 659 करोड़ रुपये की वसूली भी की गई। वहीं, पिछले साल की समान तिमाही में 26 गिरफ्तारियां हुई थीं और 549 करोड़ रुपये की बरामदगी हुई थी।
फिलहाल, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक समिति आईटीसी धोखाधड़ी रोकने और कर चोरी से निपटने के तरीकों पर विचार कर रही है
ऐसे हुई करोड़ों की गफलेबाजी..
जीएसटी व्यवस्था के तहत, कंपनियां अपने आपूर्तिकतार्ओं से खरीद पर चुकाए गए टैक्स को आईटीसी के रूप में क्लेम कर सकती हैं। लेकिन फर्जी कंपनियां सिर्फ इस टैक्स क्रेडिट का फायदा उठाने के लिए बनाई जाती हैं, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान होता है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 61,545 करोड़ रुपये की आईटीसी धोखाधड़ी पकड़ी गई थी, जिसमें 25,009 फर्जी कंपनियां शामिल थीं। फर्जी पंजीकरण के खिलाफ कार्रवाई के तहत जीएसटी अधिकारियों ने अब तक दो बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान चलाए हैं। 16 मई से 15 जुलाई 2023 के बीच 21,791 इकाइयों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं पाया गया और 24,010 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चला। 6 अप्रैल से 30 अक्टूबर 2024 के बीच जिसमें करीब 18,000 फर्जी कंपनियों का पता लगा जो 25,000 करोड़ रुपये की कर चोरी में शामिल थीं।