International Tiger Day: हर साल 29 जुलाई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मध्यप्रदेश के लिए एक विशेष अवसर बन गया है। यह वह राज्य है, जहां बाघों के संरक्षण और संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। साल 2022 में हुई अखिल भारतीय बाघ गणना के अनुसार, देशभर में कुल 3682 बाघ मौजूद हैं, जिनमें से अकेले 785 बाघ मध्यप्रदेश की धरती पर विचरण करते पाए गए। इस आंकड़े ने मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का गौरव दिलाया है।
राज्य सरकार ने बाघों के संरक्षण के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिसमें सबसे अहम वन्यजीव अपराध नियंत्रण इकाई का गठन है। यह इकाई शिकार और अवैध व्यापार की रोकथाम में अहम भूमिका निभा रही है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाइयों से न केवल अपराधियों की धरपकड़ में सफलता मिली है, बल्कि वन्यजीवों के प्रति लोगों की सोच में भी बदलाव आया है।
बाघ दिवस की शुरुआत और मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाघ दिवस की नींव वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में रखी गई थी। इस सम्मेलन में बाघों की आबादी वाले 13 देशों ने यह संकल्प लिया था कि वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना किया जाएगा। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में न केवल निरंतर प्रगति की, बल्कि देश को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया।
जुड़ते हैं जंगल, जुड़ती हैं बाघों की दुनिया
मध्यप्रदेश का भूगोल बाघों के लिए आदर्श है। राज्य के टाइगर कॉरिडोर उत्तर और दक्षिण भारत के कई बाघ अभयारण्यों से जुड़े हुए हैं, जिससे वन्यजीवों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित होती है। बाघों की संख्या में बढ़ोतरी के पीछे राष्ट्रीय उद्यानों का कुशल प्रबंधन और जंगल से सटे गांवों का योजनाबद्ध विस्थापन प्रमुख कारक हैं।
सरकार ने जिन क्षेत्रों से गांवों का विस्थापन किया, वहां अब घास के विस्तृत मैदान तैयार किए गए हैं, जिससे शाकाहारी जीवों के लिए पूरे साल भर चारा उपलब्ध होता है। यही चीतल, सांभर और अन्य शाकाहारी प्राणी बाघों के भोजन का मुख्य स्रोत बनते हैं। इन उपायों के चलते बाघों के रहवास क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
प्रबंधन में अव्वल, यूनेस्को की नजर में सतपुड़ा
राज्य के टाइगर रिजर्व न केवल वन्यजीव संरक्षण बल्कि प्रबंधन में भी देश में शीर्ष पर हैं। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। वहीं, पेंच टाइगर रिजर्व को केंद्र सरकार की मूल्यांकन रिपोर्ट में सर्वोच्च रैंक मिली है। बांधवगढ़, कान्हा और संजय टाइगर रिजर्व को भी श्रेष्ठ प्रबंधन के लिए विशेष मान्यता प्राप्त हुई है।
बाघों के संरक्षण में तकनीक और समुदाय की साझेदारी
मध्यप्रदेश सरकार ने संरक्षण के क्षेत्र में कई आधुनिक पहलें शुरू की हैं। बाघों की निगरानी के लिए GPS ट्रैकिंग, कैमरा ट्रैप और M-STriPES मोबाइल ऐप जैसे उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं, ग्राम वन समितियों को भी संरक्षण प्रक्रिया में जोड़ा गया है, जिससे स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
प्रदेश में 9 सक्रिय टाइगर रिजर्व हैं जिनमें बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना, पेंच, सतपुड़ा, संजय, माधव, नौरादेही और हाल ही में घोषित डॉ. विष्णु वाकणकर टाइगर रिजर्व (रातापानी) शामिल हैं। इनमें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व सबसे प्रसिद्ध है और यहां सबसे अधिक बाघ हैं।
विदेशी पर्यटकों का भी बढ़ा आकर्षण
मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। वर्ष 2024-25 में प्रदेश के इन रिजर्वों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। अकेले कान्हा और बांधवगढ़ में हजारों विदेशी मेहमान बाघों की दहाड़ सुनने पहुंचे। बीते पांच वर्षों में प्रदेश में कुल 8.24 लाख पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व का दौरा किया, जिससे राज्य को लगभग 61 करोड़ रुपये की आय हुई।
कान्हा: बाघों का सबसे उपयुक्त घर
भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा की गई एक रिपोर्ट में कान्हा टाइगर रिजर्व को देश में बाघों के लिए सर्वश्रेष्ठ आवास घोषित किया गया है। यहां घास के मैदान, सघन जंगल और बहती नदियां बाघों को प्राकृतिक सुरक्षा और आहार देती हैं। चीतल, सांभर, गौर जैसे शाकाहारी प्राणियों की प्रचुरता कान्हा को बाघों के लिए आदर्श निवास बनाती है।
यह टाइगर रिजर्व मंडला जिले में स्थित है और इसका क्षेत्रफल 2074 वर्ग किलोमीटर है। कोर और बफर क्षेत्रों को ध्यान से प्रबंधित किया गया है ताकि बाघों को निर्बाध रूप से घूमने का अवसर मिल सके।
नवाचारों से बनी अलग पहचान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर बाघ संरक्षण में कई नए प्रयोग शुरू किए गए हैं। उज्जैन और जबलपुर में आधुनिक रेस्क्यू सेंटर की स्थापना की जा रही है। पन्ना टाइगर रिजर्व में ड्रोन स्क्वॉड के जरिए जंगल की निगरानी और आपात स्थिति में मदद दी जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा 200 से अधिक गांवों का विस्थापन कर बाघों के रहवास क्षेत्र को विस्तृत किया गया है, जिससे उनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अपराध नियंत्रण और वैश्विक सहयोग की दिशा में प्रयास
मध्यप्रदेश में वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। ड्रोन और कैमरा ट्रैप जैसे आधुनिक साधनों से शिकारियों पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग ने अपराधियों की सूची तैयार की है और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से संरक्षण प्रयासों को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
इन प्रयासों का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश न केवल भारत बल्कि दुनिया के नक्शे पर भी बाघों की राजधानी के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।