भोपाल में सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित किए गए खतरनाक स्थानों, यानी ब्लैक स्पॉट्स की संख्या में कमी लाने के प्रयासों को लेकर अब गंभीर मंथन शुरू हो गया है। बीते तीन वर्षों में शहर के इन ब्लैक स्पॉट्स पर 27 लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क संरचना में सुधार कर इन दुर्घटनाओं पर कैसे लगाम लगाई जा सकती है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने भोपाल के प्रमुख ब्लैक स्पॉट्स का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर इन स्थलों की वास्तविक स्थिति को देखा और प्रशासन को उन सुधारों के सुझाव दिए, जिनके ज़रिए इन खतरनाक इलाकों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रोटरी का आकार घटाकर, फुटपाथ की चौड़ाई में संतुलन लाकर, अतिक्रमण हटाकर, स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक सिग्नल की समुचित व्यवस्था कर, शहर में ब्लैक स्पॉट्स की संख्या में काफी कमी लाई जा सकती है।
कैम्पियन स्कूल तिराहे से लेकर 1100 क्वार्टर तक के मार्ग पर सेंट्रल डिवाइडर बनाए जाने और रोटरी को छोटा किए जाने की सिफारिश की गई है। इससे न केवल ट्रैफिक सुचारु रूप से संचालित होगा, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी घटेगी। इसी के साथ फुटपाथों पर हुए अवैध कब्जों को हटाने और सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था लागू करने से इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
तरण पुष्कर तिराहे की बात करें तो यहां स्थायी रोटरी का निर्माण और तीनों ओर स्पीड ब्रेकर बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। वहीं बोर्ड ऑफिस की ओर जाने वाले मार्ग पर मौजूद मीडिएटर वाल को एक मीटर तक बढ़ाकर और फुटपाथ की चौड़ाई कम करके वाहनों को आसानी से मोड़ने की जगह दी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, रेरा भवन की दीवार को पीछे खिसकाने का सुझाव भी दिया गया है जिससे ट्रैफिक फ्लो और अधिक व्यवस्थित हो सके।
1250 तिराहे पर सुधार के लिए गुलाब उद्यान की जमीन आवश्यक बताई गई है। पीसीसी कार्यालय और सांची डेयरी के पास ट्रैफिक सिग्नल की अनुपस्थिति भी दुर्घटनाओं को आमंत्रण देती है, इसलिए यहां सिग्नल लगाए जाने की आवश्यकता जताई गई है।
गोविंदपुरा टर्निंग तिराहे से लेकर अन्ना नगर चौराहे तक बेहतर रोशनी की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे रात के समय ड्राइवरों को स्पष्टता मिल सके। चेतक ब्रिज से अन्ना नगर जाने वाले मार्ग पर लेफ्ट टर्न को चौड़ा करने का सुझाव है, जिसके लिए भेल की जमीन का उपयोग किया जा सकता है।
रत्नागिरी तिराहे पर अयोध्या नगर से आनंद नगर की ओर जाने वाले लेफ्ट टर्न को साफ करने के लिए खंभों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की जरूरत बताई गई है। इसी तरह बागसेवनिया चौराहे पर भी लेफ्ट टर्न को स्पष्ट करते हुए सड़क की चौड़ाई 200 मीटर तक बढ़ाने की आवश्यकता है।
सड़क सुरक्षा के लिहाज से पीपुल्स अस्पताल से माधवराव सिंधिया तिराहे तक एक बेहतर सर्विस लेन की जरूरत महसूस की जा रही है, जो मुख्य बायपास पर यातायात का दबाव कम कर सके।
भोपाल की सड़क सुरक्षा को लेकर यह समीक्षा और सुधारात्मक सुझाव न केवल दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में शहर को एक अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था भी प्रदान कर सकते हैं। अब आवश्यकता है कि इन सुझावों पर शीघ्रता से कार्रवाई की जाए ताकि शहरवासियों को सुरक्षित सड़कें मिल सकें।