नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जीएसटी व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा चार स्लैब—5%, 12%, 18% और 28%—को घटाकर केवल दो, यानी 5% और 18%, करने की योजना है। इसका मतलब है कि 2017 में लागू किए गए 12% और 28% वाले टैक्स ब्रैकेट अब खत्म हो सकते हैं
56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को की, में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। अगर योजना लागू होती है तो रोजमर्रा की जरूरत के सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में गिरावट आ सकती है, वहीं लग्ज़री और “सिन गुड्स” पर टैक्स और ज्यादा बढ़ेगा।
क्या होंगे बदलाव?
केंद्र की रूपरेखा के मुताबिक, 12% टैक्स वाले लगभग सभी उत्पाद, जैसे घी, मेवे, पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर, नमकीन, दवाइयाँ और मेडिकल डिवाइस को अब 5% टैक्स श्रेणी में लाया जाएगा। इसी तरह पेंसिल, साइकिल, छाता और हेयरपिन जैसे घरेलू सामान भी सस्ते होंगे। इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद जैसे टीवी, वॉशिंग मशीन और फ्रिज, जो फिलहाल 28% टैक्स श्रेणी में आते हैं, उन्हें 18% टैक्स स्लैब में शामिल किया जाएगा।
वहीं सरकार लग्ज़री कारों, एसयूवी, तंबाकू उत्पादों, पान मसाला और सिगरेट जैसी वस्तुओं पर 40% का नया टैक्स स्लैब लागू करने पर विचार कर रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर सरकार 5% टैक्स जारी रखने के पक्ष में है, हालांकि महंगे ईवी पर ज्यादा टैक्स लगाने को लेकर चर्चा जारी है।
प्रस्ताव पर आपत्ति
इस प्रस्ताव पर विपक्ष शासित कई राज्यों—जैसे पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और झारखंड—ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी टैक्स कटौती से उनके राजस्व पर असर पड़ेगा। जीएसटी लागू करते समय केंद्र ने राज्यों को पांच साल तक राजस्व हानि की भरपाई का वादा किया था, लेकिन यह व्यवस्था जून 2022 में समाप्त हो चुकी है। अब राज्य चाहते हैं कि 40% टैक्स स्लैब से मिलने वाला अतिरिक्त उपकर सीधे उनके हिस्से में जोड़ा जाए।
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने उपभोग बढ़ाने और जीएसटी प्रणाली को और सरल बनाने का वादा किया था। ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स पहले ही इस प्रस्ताव को सिद्धांत रूप में मंजूरी दे चुका है और अब इसे 3 और 4 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में औपचारिक रूप से रखा जाएगा।
अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो जीएसटी संरचना में 2017 के बाद का सबसे बड़ा बदलाव होगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी लेकिन लग्ज़री उत्पाद महंगे हो जाएंगे।