भोपाल। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी और अन्य नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य सरकार और उसकी एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मंगलवार को भोपाल स्थित केंद्रीय पीठ ने आदेश दिया कि किसी भी नदी में बिना शुद्ध किया गया पानी, रसायन या सीवेज सीधे न डाला जाए और अधूरे पड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) को तय समय पर पूरा किया जाए।
एनजीटी ने नदियों को बचाने के लिए राज्य सरकार को दिए सख्त निर्देश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने मध्यप्रदेश की नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने का आदेश दिया है। इसमें अवैध खनन, अवैध निर्माण, पेड़ों की कटाई, नदी तट का कटाव और गंदे पानी का सीधा बहाव रोकने जैसे निर्देश शामिल हैं।
यह आदेश एनजीटी की केंद्रीय पीठ ने दिया, जिसमें न्यायिक सदस्य शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह शामिल थे। सुनवाई याचिकाकर्ता कीर्ति कुमार सदाशिव भट्ट की याचिका पर हुई।
निर्देश मुख्य रूप से नर्मदा नदी—जो मध्यप्रदेश के 14 जिलों से होकर गुजरती है—के साथ-साथ प्रदेश की अन्य नदियों पर भी लागू होंगे। आदेश मंगलवार, 2 सितंबर 2025 को भोपाल स्थित एनजीटी की केंद्रीय पीठ में सुनवाई के दौरान जारी किए गए।
नर्मदा और अन्य नदियों में बढ़ते प्रदूषण, बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) पर अवैध अतिक्रमण और अव्यवस्थित विकास गतिविधियों ने नदियों के अस्तित्व और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इसी कारण एनजीटी ने राज्य सरकार और एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा।
मॉनिटरिंग कमेटी हर तीन महीने करेगी समीक्षा, ग्रीन बेल्ट विकसित करने का भी आदेश
निर्देश के मुताबिक, मुख्य सचिव या उनके द्वारा नामित प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनेगी, जो हर तीन महीने में समीक्षा करेगी। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को लगातार पानी की गुणवत्ता की जांच और रिपोर्ट पेश करनी होगी। नर्मदा वैली डेवलपमेंट अथॉरिटी (NVDA), ईपीसीओ और एसईआईएए को संरक्षण कार्य सौंपे गए हैं।
इसके अलावा, शहरी प्रशासन को ठोस कचरे के निपटान पर सख्ती से अमल करना होगा। सिंचाई और वन विभाग मिलकर नदी किनारे हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) विकसित करेंगे ताकि पारिस्थितिकी संतुलन बहाल हो सके।