मध्य प्रदेश की 5 प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर, इस नवरात्रि यहां जरूर करें दर्शन

शारदीय नवरात्रि का पर्व आज से शुरू हो गया है, जो देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों को समर्पित है। यह पर्व बड़ी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि के दौरान लोग माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हैं। इस वर्ष नवरात्रि सोमवार, 22 सितंबर से शुरू होकर मंगलवार, 02 अक्टूबर तक चलेगी।

मंदिरों में भी इस दिन विशेष आयोजन होते हैं और भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यदि आप इस नवरात्रि देवी मां का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों के दर्शन अवश्य करें। तो आज हम मध्य प्रदेश के 5 प्रसिद्ध दुर्गा मंदिरों के बारे में बात करने जा रहे हैं।

माँ शारदा मंदिर

माँ शारदा का मंदिर जो सतना जिले की त्रिकुटा पहाड़ी पर स्थित है। बता दें कि माँ शारदा के दर्शन के लिए भक्तों को 1063 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। इस मंदिर में मैहर माता के अलावा काली, दुर्गा, शेष नाग, गौरी शंकर, काल भैरवी के साथ हनुमान आदि भी विराजमान हैं।

मां चामुंडा मंदिर

देवास के पहाड़ों की टेकरी पर विराजित बड़ी माता तुलजा भवानी और छोटी माता चामुंडा भवानी। यह अष्टमी और नवमी के मौके पर देवास रियासत के राजपरिवार द्वारा शाही हवन किया जाता है। देवी के 52 शक्तिपीठ में से एक है, देश के अन्य शक्तिपीठों पर मां के अवयव गिरे थे, लेकिन टेकरी पर माता का रक्त गिरा था।

बिजासन देवी मंदिर

इंदौर का बिजासन माता मंदिर में, जो एक हजार साल पुराना है। बिजासन माता को सौभाग्य और पुत्रदायिनी माना जाता है। वही यह विवाह के बाद यहां प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर से नवयुगल माता के दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में विराजमान नौ दैवीय प्रतिमाओं को तंत्र-मंत्र का चमत्कारिक स्थान व सिद्ध पीठ है।

कवलका माता मंदिर

कवलका माता मंदिर रतलाम जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर स्थित है। कहा जाता है कि देवी मंदिर 5000 वर्ष पुराने इस मंदिर पुराना है और यहाँ स्थित माता की मूर्ति बड़ी ही चमत्कारी है। मंदिर के प्रसाद के रूप में भक्तों को बोतल में शेष रह गई मदिरा दी जाती है।

शोणदेश नर्मदा शक्तिपीठ

शोणदेश नर्मदा शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में स्थित है और यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर देवी सती का दाहिना नितंब गिरा था, जिसके कारण इस स्थान को ‘शोणदेश’ या ‘नर्मदा शक्तिपीठ’ कहा जाता है।