“जयपुर अस्पताल अग्निकांड: 7 मरीजों की दर्दनाक मौत, ICU में बेड बने चिता!”

जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में रविवार देर रात हुए एक भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया। इस हादसे में सात मरीजों की जान चली गई, जो गंभीर हालत में वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। यह दर्दनाक घटना रात करीब 12:30 बजे अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर स्थित आईसीयू में हुई। आग इतनी भयावह थी कि कई मरीजों के बेड आग की लपटों में घिर गए और वे जलकर राख हो गए। इस हादसे में कई अन्य मरीज गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

आग लगने की सूचना मिलते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया। कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और मरीजों के परिजन तुरंत बचाव कार्य में जुट गए। दमकल विभाग की 12 से अधिक गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान 18 मरीजों को तत्काल अन्य वार्डों और अस्पताल के सुरक्षित हिस्सों में स्थानांतरित किया गया। इनमें से पांच मरीजों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। धुएं के कारण कई स्टाफ सदस्यों और परिजनों को सांस लेने में तकलीफ हुई, जिनका अस्पताल में ही इलाज चल रहा है।

शॉर्ट सर्किट बना आग का कारण

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. अनुराग धाकड़ ने बताया कि हादसे के समय आईसीयू और सेमी-आईसीयू में 18 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 11 उस वार्ड में थे जहां आग भड़की। आग के साथ मशीनों से निकले धुएं और जहरीली गैसों ने स्थिति को और भयावह बना दिया। कई मरीज पहले से ही गंभीर हालत में या कोमा में थे, जिसके कारण वे समय पर प्रतिक्रिया नहीं दे सके। जब तक बचाव दल मरीजों को सुरक्षित स्थान पर ले गया, तब तक सात मरीजों की मौत हो चुकी थी। मृतकों में चार पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने लिया जायजा, जांच के आदेश

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तुरंत अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। सीएम ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम, फायर अलार्म सिस्टम और आपातकालीन व्यवस्थाओं की गहन जांच करने को कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आईसीयू में फायर डिटेक्टर सिस्टम काम नहीं कर रहा था और आपातकालीन निकास मार्गों में अवरोधों के कारण मरीजों को बाहर निकालने में काफी परेशानी हुई।