भोपाल: मध्य प्रदेश में मादक पदार्थो पर निगरानी के लिए राज्य में हाईलेवल कमेटी बनाने के केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश का मध्य प्रदेश में लगभग पांच महीने बाद पालन किया गया। मई महीने में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नार्को कॉर्डिनेशन सेंटर के संबंध में नीतिगत विषयों पर बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा क्षेत्रीय स्तर पर उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए वर्तमान तंत्र को प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य स्तरीय नार्को कॉर्डिनेशन सेंटर समिति का पुर्नगठन करने को कहा था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस आदेश पर पांच महीने बाद प्रदेश में अमल किया गया और अक्टूबर में जाकर इस समिति का पुनर्गठन किया गया। जिसमें मुख्य सचिव समिति के अध्यक्ष बनाए गए हैं। वहीं सदस्य के रूप में एसीएस होम, डीजीपी के साथ ही लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, वन विभाग, किसान कल्याण विभाग, एडीजी डीआरआई इंदौर, डिप्टी कमिश्नर इंदौर, डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर ग्वालियर, डीआईजीरेल, स्टेट ड्रग कंट्रोलर आदि अफसरों को सदस्य बनाया गया है।
यह होगा समिति के काम का दायरा…
इस समिति को प्रदेश में मादक पदार्थो की तस्करी की स्थिति की निगरानी करना होगी। ड्रग कानून प्रवर्तन और नशीली दवाओ के दुरूपयोग से संबंधित मामलो पर राज्य सरकार की विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के मुद्दों पर समय-समय पर चर्चा करना होगी। राज्य स्तर पर नशीली दवाओं के दुरूपयोग के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना होगा। राज्य में मादक फसलों की अवैध खेती से प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक विकास कार्यक्रम तैयार करना और कार्यान्वित करना होगा। नशीली दवाओ के दुरूपयोग के नियंत्रण के लिए एनएफसीडीए के तहत स्वीकृत राशि के उपयोग की निगरानी करना, राज्य में फॉरेसिंक क्षमता का गैप विश्लेषण और उसे भरने के लिए कदमों का कार्यान्वयन, राज्य में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की स्थापना करवाना होगी।