अब तक ना राइफल जब्त की और ना रिमांड की मांग
राजधानी में बालाघाट हॉक फोर्स में पदस्थ डीएसपी के इंजीनियर साले उदित की हत्या करने वाले पुलिसकर्मियों को अब बचाने की कोशिश शुरू हो गई है। उस समय आरक्षक के पास सरकारी राइफल थी, जिससे मारने का आरोप मृतक के दोस्तों ने लगाया था। उसे पुलिस ने अब तक जब्त तक नहीं किया है। इतना ही नहीं पुलिस आज उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेजने की तैयारी कर रही है। जबकि पुलिस को उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहिए। ऐसे में अब पिपलानी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खडेÞ होने लगे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उदित हत्याकांड में मौके पर मौजूद दोस्तों ने पुलिस को बताया था कि उस समय आरक्षक संतोष बामनिया के पास सरकारी इंसास रायफल थी। उस रायफल के बट से उदित की पिटाई की गई थी। गवाहों के आरोप के बाद भी पुलिस ने अब तक रायफल जब्त नहीं की है। डीसीपी विवेक सिंह का कहना है कि इस संबंध में डॉक्टरों से रिपोर्ट मांगी गई कि किस वस्तु की चोट से पेनक्रियाज डैमेज हुए हैं। उस वस्तु की पुष्टि होने के बाद उसे जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। डीसीपी जोन-2 विवेक सिंह ने बताया कि अभी सिर्फ एफआईआर दर्ज हुई है, अब केस डायरी में पूरा विवतरण लिखा जाएगा। जिससे आरोपियों कोर्ट में सजा मिल सके। साथ ही डॉक्टरों से भी विस्तृत पीएम रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों की माने तो एफआईआर हुई गलती को लेकर पुलिस अब केस डायरी में उसे संशोधित करने की कोशिश में लगी हुई है। हालांकि परिजनों को पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा नहीं है। इंजीनियर उदित गायकी हत्याकांड मामले में अब परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग की है। मृतक के मामा अजय कुमार ने कहा कि पुलिस ने दोनों आरक्षकों को संरक्षण देने का काम कर रही है। इसका खुलासा खुद एफआईआर की भाषा में दिखाई दे रहा है। इसलिए अब पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराना चाहिए। इस संबंध में उनका परिवार मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलकर करेगा।
गिर सकती है थाना प्रभारी और जांच अधिकारी पर गाज
पुलिस सूत्रों की माने तो हत्या के मामले में ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने पर अब पिपलानी थाना प्रभारी चंद्रिका यादव और जांच अधिकारी एएसआई अजय दुबे पर गाज गिर सकती है। क्योंकि जिस तरह से एफआईआर लिखी गई है, उसको लेकर डीजीपी ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। क्योंकि एफआईआर में मृतक छात्र और उसके दोस्तों को शराबी बाते हुए पूरी स्क्रिप्ट लिखी गई है।