ऑलइंडिया परमिट पर इंटर स्टेट बसों के लिए कोई किराया नियमन न होने के कारण जहां प्रदेश का विभाग बेबस है वहीं यात्री भी लुट रहे हैं। दीपावाली के समय में अस्थाई परमिट लेकर चल रही निजी बसों में 300 से 5000 रुपए तक अतिरिक्त किराया वसूला जा रहा है। यह स्थिति केवल इंटर स्टेट बसों में नहीं प्रदेश के भीतर भी यात्री लुट रहे हैं जिसका आंकड़ा सीजन में लगभग 800 करोड़ रुपए तक होगा।
भोपाल: दीवाली सीजन में बसों में यात्रा करने वालों को चौगुने तक किराया देना पड़ रहा है। यह स्थिति इंटरस्टेट यात्रा करने वालों के साथ तो है ही प्रदेश के शहरों में यात्रा करने वाले भी इससे अछूते नहीं है। राजधानी वर्मा ट्रेवल्स ने भोपाल से कानपुर का किराया 7499 बताया है, जबकि हंस ट्रेवल्सका भी करीब इतना ही है। इसके अतिरिक्त भोपाल से इंदौर, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, सतना, रीवा जबलपुर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड सहित प्रदेश के अन्य शहरों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों से भी सीजन में मनमाना किराया वसूली भी होने लगी है।
केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट के आधार पर परिवहन विभाग द्वारा किराए को लेकर तय किए गए मापदंडों का पालन खुद ऑपरेटर नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि स्टेट द्वारा प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय किए गए किराए के दायरे को भी बस आपरेटर लांघ रहे हैं। इसमें विशेष रूप से 7 से 20 दिनों का अस्थायी परमिट लेने वाले बस आपरेटरों की संख्या ज्यादा है। इनमें से कुछ ने केवल प्रांत का परमिट लिया है तो कई आपरेटर इंटर स्टेट के लिए आल इंडिया परमिट के आधार पर बसें चला रहे हैं। प्रदेश में इंटर स्टेट वाली बसों की संख्या 6 हजार से ज्यादा है, इनमें प्रति व्यक्ति और प्रति सीट के मुनाफे का जोड़ 20 दिन के सीजन में 800 करोड़ से ज्यादा है जो खुली लूट है।
इन मार्गों पर भी लूट
भोपाल से बालाघाट, सिवनी, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, टीकमगढ़, दमोह, ग्वालियर, झांसी, शिवपुरी, गुना, विदिशा, सिंरोज, लटेरी, इंदौर, देवास, उज्जैन, धार, झाबुआ, पुणे, मुंबई, कानपुर, जयपुर, खाटूश्याम, शिर्डी सहित अन्य शहरों के लिए चलने वाली निजी बस ऑपरेटर डेढ़ से दो गुना किराया यात्रियों से लिया जा रहा है।
ऐसे समझें वसूली का खेल्
राजधानी सहित पूरे प्रदेश में निजी बस ऑपरेटरों का बोलबाला और एक छत्र राज चल रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 10 हजार निजी क्षेत्र और 15 से ज्यादा विशेष अनुमति लेकर बसें रजिस्टर्ड होकर संचालित हो रही हैं। दीवाली सीजन में अब सात दिनों तक रोजाना 6 से 7 लाख यात्री इन बसों में सफर कर रहे हैं। ऐसे में यदि एक बस ऑपरेटर एक यात्री से 300 से 5000 रुपए अतिरिक्त वसूल रहा है, तो सीजन में 800 करोड़ रुपए की खुलेआम लूट मची है। जबकि, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियम है कि शासन से अनुज्ञा प्राप्त सभी सावर्जनिक बसों को शासन द्वारा निर्धारित किराए पर ही आम यात्रियों को सफर पूरा कराना है।