DPC भर्ती प्रोसेस में देरी,स्कूलों में फर्जीवाड़े की नहीं हो रही जांच

डीपीसी (डिस्ट्रिक प्रोजेट कोआर्डिनेटर) की प्रक्रिया अधूरी रह गई है। इसके कारण प्रदेश के कई जिलोें में जांच कार्य भी ठप पड़ गए हैं। हालात यह है कि जिलों के कई स्कूलों में फर्जीवाड़े की जांच नहीं हो पा रही है। इसके चलते लगातार देरी हो रही है। बताया जाता है कि राज्य के 35 जिले ऐसे हैं जहां डीपीसी (डिस्ट्रिक प्रोजेट को-आर्डिनेटर) यानि जिला परियोजना समन्वयकों की कमी बनी हुई है। इन पदों को भरने हेतु जो परीक्षा कराई गई थी उसमें चयन के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया ही पूर्ण नहीं हो पाई है। कारण यह है कि चयन समिति के अध्यक्ष राज्य शिक्षा केन्द्र संचालक हरजिंदर सिंह की ड्यूटी बिहार चुनाव में लग गई है। 21 सितंबर को राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा डीपीसी चयन परीक्षा  कराई गई थी। इसमें उच्च माध्यमिक शिक्षकों को भी शामिल किया गया था। परीक्षा के एक सप्ताह बाद रिजल्ट घोषित किया गया, लेकिन साक्षात्कार की प्रक्रिया कंप्लीट नहीं हो पाई। सिर्फ दो दिन साक्षात्कार हुए, तीसरे दिन अचानक बंद कर दिए, जो आज तक पूर्ण नहीं हो पाये। परीक्षा देने वाले राज्य शिक्षा केन्द्र से पूछ रहे हैं कि इंटरव्यू प्रक्रिया बीच में ही क्यों रोक दी गई, इसे पूरा क्यों नहीं कराया गया। 

कई जिलों में जांच कार्य ठप

 पहली से आठवीं तक की शालाओं में डीपीसी की सख्त जरूरत है। अब कई जिलों में शिक्षा अधिकारी या फिर वैकल्पिक तौर पर प्राचार्यों को प्रभार दिया गया है। इनकी व्यवस्तता के कारण इन शालाओं की नियम से बिंदुवार निगरानी नहीं हो पा रही है। प्रदेश के सागर, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर संभाग में तो अभी यह स्थिति है कि डीपीसी की कमी के कारण प्राइवेट स्कूलों के निरीक्षण और जांच का कार्य ठप पड़ा हुआ है। जिन निजी विद्यालयों को हाल ही में फीस प्रतिपूर्ति की राशि जारी की गई है, उनमें सघन निरीक्षण किया जाना था।