ईरान-अमेरिका संघर्ष में फारस की खाड़ी में बड़ा हमला

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के बीच फारस की खाड़ी में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने इराक के क्षेत्रीय जल में अमेरिकी स्वामित्व वाले एक तेल टैंकर पर ‘सुसाइड बोट’ या विस्फोटक से लैस ड्रोन से हमला किया, जिसमें एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई। इस घटना के बाद भारत की कूटनीतिक कोशिशों से ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

सूत्रों के अनुसार, हमला इराक के खोर अल जुबैर पोर्ट के पास हुआ, जहां मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला अमेरिकी कंपनी से जुड़ा तेल टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ निशाना बना। ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया कि यह अमेरिकी हितों से जुड़े जहाज पर जवाबी कार्रवाई थी। हमले में जहाज में आग लग गई और एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि बाकी क्रू सदस्यों को बासरा में सुरक्षित पहुंचाया गया। कुल 28 से अधिक लोगों को बचाया गया, जिसमें कई अन्य भारतीय भी शामिल थे।

यह घटना अमेरिका द्वारा ईरानी माइन-लेइंग जहाजों को नष्ट करने के जवाब में आई है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20% तेल निर्यात होता है, और हमलों के कारण शिपिंग ट्रैफिक लगभग ठप है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरानी समकक्ष से बातचीत के बाद तेहरान ने स्पष्ट किया कि भारतीय झंडे वाले जहाजों को कोई रोक-टोक नहीं होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम दो भारतीय टैंकर ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ अब सुरक्षित रूप से स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। ईरान ने कहा है कि केवल अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगियों से जुड़े जहाज ही लक्ष्य हैं, जबकि तटस्थ देशों जैसे भारत के जहाजों को अनुमति दी जा रही है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस हमले की निंदा की है और क्षेत्र में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रखे हैं। क्षेत्र में दर्जनों भारतीय क्रू वाले या भारतीय स्वामित्व वाले जहाज मौजूद हैं। भारत सरकार नौसेना की मदद से एस्कॉर्ट की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है।