कौन देगा जवाब: राजीव गांधी खेल अभियान योजना टांय-टांय फिस्स
विदिशा: राजीव गांधी खेल अभियान अंतर्गत जिले में पांच ब्लांको में 80 लाख की लागत से स्टेडियम का निर्माण किया गया था। उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षैत्रों से प्रतिभाओं को उभारा जा सके लेकिन जिले के हालात को देखकर लगता हैं कि किसी भी नेता और अधिकारियों की रूचि नही हैं कि खेल प्रतिभागियों को लाभ मिले इसी का उदाहरण सामने हैं जहां जिले के पांचों ब्लांकों में पांच स्टेडियम का निर्माण कराया गया लेकिन आज तक उन मैदानों में कोई भी आयोजन नही हो सका। ऐसे में सांसद खेल महोत्सव का क्या औचित्य है। जहां वर्षों पूर्व बने स्टेडियम खस्ताहाल हो चुके हों।
विदिशा जिले में राजीव गांधी खेल योजना के अंतर्गत जिले के पांच ब्लॉकों में स्टेडियम का निर्माण किया गया था। इन स्टेडियमों की 80 -80 लाख रुपए की लागत से आरईएस विभाग द्वारा निर्माण करवाया गया था। उम्मीद जताई गई थी कि इनके निर्माण होने के बाद ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं का उदय होगा। लेकिन एक लम्बा अर्सा बीत गया है इन स्टेडियमों में न तो खिलाड़ियों को किसी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई और न ही उन स्थानों पर कोई आयोजन किया गया। हालात यह है कि यह स्टेडियम कबाड़े में तब्दील हो गए हैं। जहां स्ट्रेक्चर के नाम पर मात्र खस्ताहाल भवन दिखाई दे रहे हैं और हालत बदतर बनी हुई है। दुर्भाग्य है विदिशा कि कागपुर मे बना स्टेडियम खस्ताहाल है। जिसका उद्घाटन 26 मई 2022 को तात्कालीन मुख्मंत्री शिवराजसिंह चौहान के द्वारा किया गया था। वहां भी खेल मैदान में घांस देखने को मिल रही है। बात करें तो अन्य ब्लॉकों की जिनमें स्टेडियम बने हैं। उनमें खेल सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है।
जिला पंचायत के अंतर्गत आने वाले रसूलपुर, मोहनपुरा, ओखलीखेड़ा और पठारी में बने पांचों स्टेडियम लंबे समय से बंद पड़े हैं। इन मैदानों में न तो किसी प्रकार की खेल गतिविधियां हो रही हैं, न ही रखरखाव या प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था है। मैदानों में घास उग आई है, दीवारें जर्जर हो चुकी हैं और उपकरण बेकार पड़े हैं। वहीं खेल विभाग के अधीन विदिशा, बासौदा और सिरोंज के तीनों स्टेडियम भी खस्ताहाल हैं। इनकी हालत इतनी खराब है कि हाल ही में सिरोंज में आयोजित 69वीं राज्य स्तरीय शालेय फुटबॉल प्रतियोगिता बालक-बालिका वर्ग 19 वर्ष का एक भी मैच सिरोंज स्टेडियम में नहीं कराया जा सका। जिला खेल अधिकारी द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग से समन्वय कर एक लिंक जारी कर स्कूलों से खेल मैदानों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन मैदानों में न तो प्रशिक्षक हैं, न ही रखरखाव के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त है। परिणामस्वरूप मैदान बदहाली की कगार पर पहुंच गए हैं। लाखों रुपये खर्च कर बने ये स्टेडियम आज तालों में जकड़े पड़े हैं। सवाल यह उठता है कि जब जिले के मैदान ही बंद पड़े हैं तो खिलाड़ियों को मंच कहां मिलेगा? ऐसे में विदिशा में आयोजित सांसद खेल महोत्सव की सार्थकता पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खिलाड़ियों का भविष्य अंधकार में है और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना बैठा है। वहीं दूसरी ओर विदिशा जिले में केवल कबड्डी खेल के लिए जिला मुख्यालय पर कोच नियुक्त किया गया है। और एक कोच वॉलीबॉल के लिए नियुक्त किया गया था लेकिन 2016 से नरसिंहपुर में अटैच है। जो कि नियम विरुद्ध है क्योंकि संविदा में अटैचमेंट का कोई नियम ही नहीं बनता। इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ जेएस सनोठिया से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने इस संबंध में जानकारी देने से मना कर दिया।