पीलिया व चोर घाट के नाले का गंदा पानी मिल रहा है बेतवा नदी में

विदिशा: पीलिया और चोर घाट के नाले का गंदा पानी बेतवा नदी में मिल रहा है। जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। समस्या के समाधान के लिए कई सामाजिक संगठनों द्वारा समय-समय आंदोलन भी किए गए। लेकिन आज भी उक्त दो नाले के माध्यम से दूषित पानी नदी में मिल रहा है। अमृत 02 योजना के अंतर्गत पंप हाउस बनाकर नालों का गंदा पानी बेतवा नदी में मिलने से रोकने के लिए तैयारी शुरू हो गई है।

पीलिया व चोर घाट के नाले का गंदा पानी जीवन दायिनी बेतवा नदी में मिलकर उसके पानी को भी दूषित कर रहा है। उक्त दोनों नाले के माध्यम से नदी में गंदा पानी मिलने की समस्या काफी पुरानी हो चुकी है। बेतवा के शुद्विकरण को लेकर कई बार आंदोलन हुए लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। परिणाम रूवरूप आज भी नालों का गंदा पानी बेतवा नदी में मिल रहा है। समस्या के समाधान हेतु अमृत 02 योजना के तहत अब इंटर मीडियट पंपिंग स्टेशन बनाने का काम शुरू हो गया है। कार्य पूरा हो जाने के बाद दूषित पानी को स्टोरेज करके पाईप लाइन की सहायता से एसटीपी भेजा जाएगा। जहां से पानी उपचारित करके ऑनलाइन प्रदूषण बोर्ड भोपाल भेजा जाएगा। बोर्ड से ओके रिर्पोट आने के बाद ही पानी को नदी में छोड़ा जाएगा। लेकिन इसमें अभी वक्त लगेगा। वर्तमान में उक्त नालों का पानी नदी में मिल रहा है।

दो जगह बनेंगे पंप हाउस

अमृत 02 योजना के अंतर्गत गंदे पानी को बेतवा नदी में मिलने से रोकने के लिए इंटर मीडिएट पंपिंग स्टेशन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। जहां पंप हाउस बनने के बाद गंदे पानी को नदी में मिलने से रोकने के लिए स्टोरेज किया जाएगा। जानकारी के अनुसार इंटर मीडिएट पंपिंग स्टेशन नदी के किनारे चोर घाट व गौ-शाला नाले के पास बनेंगे। इंटर मीडिएट पंपिंग स्टेशन बनने के बाद दूषित पानी सीधे तौर पर बेतवा नदी में मिलने से रुकने लगेगा। स्टोरेज दूषित पानी को पाइप लाइन की सहायता से फिल्टर प्लांट पहुंचाया जाएगा। जहां से गंदे पानी को फिल्टर करके प्रदूषण बोर्ड भोपाल भेजा जाएगा। बोर्ड की ओके रिपोर्ट के बाद उपचारित पानी को नदी में छोड़ा जाएगा।

3 किलो मीटर डलेगी पाइप लाइन

एसटीपी यानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जहां पर दूषित पानी को उपचारित किया जा रहा है। पीलिया व चोर घाट के नाले का गंदा पानी नदी में मिलने से रोकने के बाद तीन किलो मीटर की पाइप लाइन डाली जाएगी जिसके माध्यम से गंदा पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचेगा। जानकारी के मुताबिक चोर घाट नाले से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दूरी करीब दो किलो मीटर एवं गौ-शाला नाले से ट्रीटमेंट प्लांट की दूरी एक किलो मीटर इस तरह से तीन किलो मीटर की पाइप लाइन डलना है। इसके बाद एसटीपी से उपचारित पानी को पैरामीटर ऑनलाइन के माध्यम से प्रदूषण बोर्ड भोपाल भेजा जाएगा। बोर्ड की ओके रिर्पोट आने के बाद ही पानी को नदी में मिलाया जाएगा।

मार्च तक तैयार हो जाएगा

पंपिंग स्टेशनजानकारी के अनुसार घोर घाट व शौ-शाला के समीप नदी किनारे पंप हाउस बनाए जा रहे हैं। जहां से गंदा पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा। जिस गति से अभी काम चल रहा है उसमें 5 से 6 महीना का समय और लगना है। इंटर मीडियट पंपिंग स्टेशन 31 मार्च 2026 तक बनाकर तैयार हो सकते हैं। फिलहाल की स्थिति में उक्त नालों का गंदा पानी नदी में मिल रहा है।