कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को खाटू श्याम बाबा का जन्मोत्सव बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन खाटू श्याम बाबा का जन्म हुआ था, जिन्हें कलियुग के देवता के रूप में पूजा जाता है।
महाभारत काल के वीर बरबारिका का रूप:
लोककथाओं में खाटू श्याम बाबा को भीम के पोते और वीर बरबारिका माना गया है। वे अत्यंत पराक्रमी योद्धा थे और उनके पास तीन अमोघ तीर थे। उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि वे युद्ध में सदैव कमजोर पक्ष का साथ देंगे।
भगवान कृष्ण की परीक्षा और वरदान:
जब भगवान कृष्ण ने बरबारिका की परीक्षा ली, तो उन्होंने अपना सिर अर्पित कर दिया। कृष्ण उनके त्याग और भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और वरदान दिया कि कलियुग में तुम ‘श्याम’ नाम से पूजे जाओगे और जो भी भक्त सच्चे मन से तुम्हारी शरण में आएगा, उसकी हर मनोकामना पूरी होगी।
खाटूधाम में उमड़ा भक्तों का सैलाब:
आज राजस्थान के खाटूधाम में हजारों श्रद्धालु बाबा श्याम के दरबार में माथा टेकने पहुँचे हैं। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, आरती, प्रसाद वितरण और विशाल भंडारों का आयोजन किया गया है। श्रद्धालु बाबा श्याम से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं।
इस अवसर पर पूरा खाटूधाम “श्याम नाम के जयकारों” से गूंज रहा है, और भक्त भक्ति एवं भावनाओं में सराबोर होकर बाबा श्याम की महिमा का गुणगान कर रहे हैं।