भारत सहित विश्व भर में सिख समुदाय आज गुरु नानक देव जी की जयंती धूमधाम से मना रहा है। यह पर्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन आता है और इस वर्ष यह 5 नवंबर को पड़ रहा है। गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है, जो सिख धर्म के प्रथम गुरु के जन्म और उनके उपदेशों की याद दिलाता है।
गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में पंजाब के तलवंडी (वर्तमान में पाकिस्तान में ननकाना साहिब) गांव में हुआ था। वे सिख धर्म के संस्थापक थे और अपने जीवनकाल में उन्होंने एकेश्वरवाद, समानता, भाईचारा और सेवा भावना जैसे सिद्धांतों का प्रचार किया। उनके उपदेश आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। गुरु नानक जी ने कहा था, “न कोई हिंदू, न कोई मुसलमान” – यह वाक्य उनकी उदारता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है।
इस अवसर पर देश भर के गुरुद्वारों में विशेष आयोजन हो रहे हैं। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। यहां सुबह से ही अखंड पाठ, कीर्तन और गुरबानी का पाठ चल रहा है। श्रद्धालु लंगर में भाग लेते हैं, जहां सभी जाति-धर्म के लोग एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं। यह परंपरा गुरु नानक जी के समानता के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य शहरों में भी नगर कीर्तन निकाले जा रहे हैं। इन जुलूसों में पंज प्यारे आगे चलते हैं, जबकि बच्चे, युवा और बुज्जुग गतका (सिख मार्शल आर्ट) का प्रदर्शन करते हैं। विदेशों में कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका के सिख समुदाय भी इस पर्व को उत्साह से मना रहे हैं।
गुरु नानक जयंती न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सच्ची खुशी सेवा और प्रेम में निहित है। सिख समुदाय के साथ पूरा देश इस प्रकाश पर्व की रोशनी में नहा रहा है।