बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए कल मंगलवार, 11 नवंबर को सुबह से वोटिंग होगी।यह उपचुनाव प्रदेश की सियासत के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है, जहाँ मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के साथ-साथ एक मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी के कारण त्रिकोणीय हो गया है। चुनाव आयोग ने कुल 2,27,563 मतदाताओं के लिए 268 मतदान केंद्र बनाए हैं और मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
मुकाबला कड़ा, 15 प्रत्याशी मैदान में
इस उपचुनाव में कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को मैदान में उतारा है, जिन पर भ्रष्टाचार के पुराने मामलों को लेकर भाजपा हमलावर रही है। वहीं, भाजपा ने स्थानीय कार्यकर्ता मोरपाल सुमन पर दांव खेला है। इसके अलावा, युवा नेता नरेश कुमार मीणा के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद रोचक हो गया है, क्योंकि वह दोनों प्रमुख दलों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अंता उपचुनाव को ‘धनबल और जनबल’ की सीधी लड़ाई बताते हुए इशारों-इशारों में कांग्रेस प्रत्याशी पर हमला किया है, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जैसे दिग्गजों ने भी आखिरी चरण में रैलियां करके अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हर मतदान दल के साथ पुलिस बल तैनात किया गया है, और संवेदनशील एवं क्रिटिकल मतदान केंद्रों पर सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) के जवान मोर्चा संभालेंगे।
पूरे विधानसभा क्षेत्र की निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए 12 क्विक रिस्पांस टीम (QRTs), 43 मोबाइल पार्टियां, और 43 सेक्टर मजिस्ट्रेटों सहित कुल 100 से अधिक पर्यवेक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें नियुक्त की गई हैं। निर्वाचन विभाग ने 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से वोट डालने की विशेष व्यवस्था भी की है।
उप-चुनाव में बढ़ा वोटर आधार
अंता में कुल मतदाताओं की संख्या अब 2,27,563 हो गई है, जो पुनरीक्षण अभियान के बाद 1,336 की वृद्धि दर्शाता है। यह उपचुनाव उस सीट पर हो रहा है जो पहले विधायक कंवर लाल मीणा की सदस्यता रद्द होने के कारण खाली हुई थी।3 हालांकि इस उपचुनाव के परिणाम से प्रदेश की सरकार पर कोई सीधा संख्यात्मक असर नहीं पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक पर्सेप्शन और सरकार के कामकाज पर जनमत परीक्षण के रूप में इसका परिणाम दोनों प्रमुख दलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।