पहाड़ी राज्यों, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर, में हुई व्यापक बर्फबारी के कारण मध्य प्रदेश इस समय शीतलहर की चपेट में है। उत्तरी दिशा से आ रही बर्फीली हवाओं ने राज्य के तापमान को अभूतपूर्व रूप से नीचे धकेल दिया है, जिसके चलते कई शहरों में पिछले कई सालों के रिकॉर्ड टूट गए हैं।
मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक ऐसे ही कड़ाके के मौसम का अनुमान लगाते हुए अलर्ट जारी किया है। अनूपपुर और बालाघाट जिलों में पिछले दो दिनों से लगातार कोल्ड डे की स्थिति बनी हुई है, और गुरुवार को भी इसके जारी रहने की आशंका है। इसके अलावा, विभाग ने इंदौर, राजगढ़, भोपाल, शाजापुर, सीहोर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, उमरिया और सिवनी समेत कुल 13 जिलों में शीतलहर (Cold Wave) चलने की चेतावनी दी है।
तापमान में रिकॉर्ड गिरावट
बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात राज्य के कई शहरों के न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। राजगढ़ प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहाँ पारा लुढ़ककर 7.4 डिग्री पर पहुँच गया। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री रहा, जिसने पिछले 10 साल का नवंबर का रिकॉर्ड तोड़ दिया, क्योंकि यह साल 2015 के बाद सबसे कम तापमान है। वहीं, इंदौर में पारा 7.6 डिग्री तक जा चुका है, जो पिछले 25 साल में नवंबर के महीने में सबसे अधिक ठंड है।
जबलपुर, उमरिया, नौगांव और रीवा में भी पारा10 डिग्री के आस-पास या उससे नीचे रहा। इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में भी तापमान 13.4 डिग्री दर्ज किया गया।
ठंड बढ़ने का कारण
मौसम विशेषज्ञ पीके शाह ने इस तीव्र ठंड के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि इस बार हिमालय क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) एक सप्ताह पहले ही सक्रिय हो गए, जिसके परिणामस्वरूप पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी हो रही है। उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली यही बर्फीली हवाएं मध्य प्रदेश में प्रवेश कर रही हैं, जिससे ठंड का असर अचानक इतना तेज हो गया है। दिन के समय धूप निकलने से भले ही थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन रात और सुबह की ठंड बर्फीली बनी हुई है।
यह ट्रेंड नवंबर के महीने में असामान्य रूप से जल्दी आया है, जो बताता है कि इस बार सर्दी लंबी और कड़ाके की हो सकती है।