केरवा के बाघ भ्रमण क्षेत्र में खुलेआम चल रही पार्टियां,वन्यजीवों की सुरक्षा पर खतरा

केरवा जंगल कैंप में जलाए जा रहे चूल्हे, तेज आवाज में बज रहे डीज

भोपाल: केरवा इको टूरिज्म (केरवा जंगल कैंप) में हो रही अनैतिक और अवैध गतिविधियों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। यह क्षेत्र बाघ भ्रमण क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। बावजूद इसके, यहां खुलेआम पार्टियां और देर रात तक तेज आवाज में गाने बजाकर नाच-गाना किया जाता है। यहां पर सुबह से लेकर रात तक शराब पार्टियां होती हैं। इससे न केवल जंगल की शांति भंग हो रही है, बल्कि बाघ और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय रहवासियों और पर्यावरण प्रेमियों का इस मामले में कहना है कि यह इलाका संवेदनशील ईको जोन के अंतर्गत आता है, जहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि या पार्टी की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके बावजूद, जिम्मेदार विभाग आंख बंद किए बैठे हैं। जंगल में खुले स्थान पर चूल्हा बनाकर खाना पकाना और फिर वहां पर कचरा फेंककर प्रदूषण फैलाया जा रहा है। कई बार इस संबंध में शिकायतें वन विभाग और जिला प्रशासन तक हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई इस दिशा में नहीं की गई।

केरवा में अक्सर दिखते हैं बाघ-शावक

केरवा क्षेत्र में बाघ, शावक व अन्य वन्यजीव अक्सर दिखाई देते हैं। इस तरह के आयोजन उनके व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ा सकते हैं। वन नियमों के तहत बफर या कोर जोन में इस तरह की गतिविधियां प्रतिबंधित हैं, लेकिन फिर भी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

जंगल के अंदर आग व चूल्हे से बड़ा खतरा

बाघ भ्रमण क्षेत्र वाले कई स्थानों पर खाना बनाने हेतु खुले व जले हुए चूल्हे मिले, जिससे आग फैलने का उच्चतम जोखिम है। जगह-जगह प्लास्टिक, कागज, शराब की खाली बोतलें व अन्य ठोस अपशिष्ट पड़े मिले, जो वन्यजीवों के स्वास्थ्य व पारिस्थितिकी के लिए घातक हैं। जहां भी प्लास्टिक व कचरा पड़ा है, वहां अभियान चलाकर तुरंत सफाई होनी चाहिए।