बिहार चुनाव हार के बाद कांग्रेस का बड़ा दावा: ‘90% स्ट्राइक रेट अविश्वसनीय, दो हफ्ते में पेश करेंगे धांधली के सबूत’

बिहार विधानसभा चुनाव में मिली बुरी हार के बाद कांग्रेस पार्टी ने सबसे पहले अपनी बैठक आयोजित की। इसके बाद पार्टी ने दावा किया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। कांग्रेस नेताओं ने वादा किया कि दो सप्ताह के अंदर इसके पुख्ता सबूत पेश कर दिए जाएंगे। बैठक खत्म होने पर राहुल गांधी ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।

पार्टी के कमजोर प्रदर्शन पर सवाल उठने पर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कथित मतदान में धांधली का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूरी चुनावी प्रक्रिया पर संदेह है और इसमें पारदर्शिता का अभाव है। परिणाम एकतरफा रहे हैं, जिससे सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने जोर दिया कि नतीजों की गहराई से जांच जरूरी है और इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। एक-दो हफ्ते में ठोस प्रमाण सामने रखे जाएंगे।

वेणुगोपाल ने पत्रकारों से कहा कि एक राजनीतिक गठबंधन का 90 प्रतिशत से अधिक स्ट्राइक रेट भारतीय चुनाव इतिहास में अभूतपूर्व है। ये परिणाम न सिर्फ हमारे लिए अविश्वसनीय हैं, बल्कि बिहार के लोग और हमारे सहयोगी दल भी इन्हें मानने को तैयार नहीं हैं। हमने सभी से चर्चा की है। हम गहन विश्लेषण कर रहे हैं और पूरे राज्य से डेटा जुटा रहे हैं। शनिवार को एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए गए।

पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के निवास पर राहुल गांधी ने शीर्ष नेताओं के साथ चुनाव नतीजों पर लंबी चर्चा की। मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि ये परिणाम विश्वसनीय नहीं हैं और कुछ हफ्तों में सबूत प्रस्तुत किए जाएंगे। इस मंथन में केसी वेणुगोपाल, पार्टी कोषाध्यक्ष अजय माकन और बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू भी शामिल थे।

दरअसल, कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा और महज छह पर जीत हासिल की। 2010 के बाद बिहार में यह पार्टी का दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है, जब केवल चार सीटें मिली थीं। 2020 में 70 सीटों पर लड़ते हुए 19 सीटें और 9.6 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। इस बार एनडीए ने 202 सीटें जीतीं।

राहुल गांधी की चुनाव को निष्पक्ष न बताने वाली टिप्पणी पर पूछे जाने पर वेणुगोपाल ने कहा कि हम लगातार चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं। हरियाणा चुनाव में भी हमने धांधली की बात कही थी। चुनाव आयोग पूरी तरह पक्षपाती है। उनके कामकाज में कोई पारदर्शिता नहीं है, इसलिए पूरी प्रक्रिया संदिग्ध लगती है।