प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, बुधवार 19 नवंबर को आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के दौरे पर हैं, जहां वे एक स्मारक सिक्का जारी करने, पूजा स्थलों का दौरा करने और एक कृषि शिखर सम्मेलन में पीएम-किसान की 21वीं किस्त जारी करने सहित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
उन्होंने मंगलवार को ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि वे 19 नवंबर को पुट्टापार्थी में श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह में आंध्र प्रदेश के अपने बहनों और भाइयों के बीच उपस्थित होने की आशा कर रहे हैं। उन्होंने समाज सेवा और आध्यात्मिक जागरण के प्रति श्री सत्य साईं बाबा के जीवन और प्रयासों पर भी प्रकाश डाला था।
प्रधानमंत्री के बुधवार के कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह लगभग 10 बजे आंध्र प्रदेश के पुट्टापार्थी में भगवान श्री सत्य साईं बाबा के पवित्र तीर्थस्थल और महासमाधि पर पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद, लगभग 10:30 बजे, प्रधानमंत्री भगवान श्री सत्य साईं बाबा के शताब्दी समारोह में भाग लेंगे। इस अवसर पर, वे श्री सत्य साईं बाबा के जीवन, शिक्षाओं और स्थायी विरासत का सम्मान करते हुए एक स्मारक सिक्का (Commemorative Coin) और डाक टिकटों का एक सेट जारी करेंगे, साथ ही सभा को संबोधित भी करेंगे।
इसके उपरांत, प्रधानमंत्री तमिलनाडु के कोयंबटूर के लिए रवाना होंगे, जहां वे दोपहर लगभग 1:30 बजे दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन 2025 का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान, पीएम मोदी देश भर के 9 करोड़ किसानों को समर्थन देने के लिए पीएम-किसान की 21वीं किस्त के रूप में ₹18,000 करोड़ से अधिक की राशि जारी करेंगे। इस अवसर पर वे उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे।
तमिलनाडु नेचुरल फार्मिंग स्टेकहोल्डर्स फोरम द्वारा आयोजित यह शिखर सम्मेलन 19 से 21 नवंबर तक चलेगा, जिसका लक्ष्य टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। यह सम्मेलन प्राकृतिक और पुनर्योजी खेती को भारत के कृषि भविष्य के लिए एक व्यवहार्य, जलवायु-स्मार्ट और आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल के रूप में बदलने पर ज़ोर देगा। इस दौरान किसान-उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए बाज़ार संपर्क स्थापित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें जैविक इनपुट, एग्रो-प्रोसेसिंग, पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग और स्वदेशी तकनीकों में नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के 50,000 से अधिक किसान, प्राकृतिक खेती करने वाले, वैज्ञानिक और अन्य हितधारक भाग लेंगे।