अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बहिष्कार के बावजूद, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित G20 समिट के पहले दिन (शनिवार) सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से तैयार किए गए घोषणा पत्र को मंजूरी दे दी। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि अंतिम बयान पर सभी देशों की सहमति आवश्यक थी, भले ही अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ।
2026 की अध्यक्षता ‘खाली कुर्सी’ को सौंपी जाएगी
ट्रम्प ने मेजबानी लेने के लिए एक अमेरिकी अधिकारी को भेजने की बात कही थी, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने इस प्रस्ताव को नकार दिया। अब राष्ट्रपति रामफोसा आज G20 की अगली अध्यक्षता ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेंगे, क्योंकि ट्रम्प के बहिष्कार के कारण अमेरिका का कोई भी प्रतिनिधि समिट में शामिल नहीं हुआ, जबकि G20 समिट की 2026 की मेजबानी अमेरिका को मिलनी है।
पुराने डेवलपमेंट मॉडल को बदलना जरूरी: PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के पहले दो सत्रों को संबोधित किया और पुराने डेवलपमेंट मॉडल के मानकों पर दोबारा विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा, “आज के ग्लोबल विकास मॉडल के पैरामीटर्स ने बड़ी आबादी को रिसोर्स से वंचित किया है और प्रकृति के दोहन को बढ़ावा दिया है, अफ्रीकी देशों पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखता है।” उन्होंने इस मॉडल को बदलना जरूरी बताया।
PM मोदी ने समिट में तीन प्रमुख पहलें भी पेश कीं:
- वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार: दुनिया के लोक ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा और सामुदायिक प्रथाओं को एक मंच पर लाना।
- अफ्रीका स्किल इनिशिएटिव: अफ्रीकी युवाओं के लिए कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर बढ़ाना।
- ड्रग–टेरर नेक्सस के खिलाफ पहल: ड्रग तस्करी, अवैध पैसों के नेटवर्क और आतंकवाद की फंडिंग को एकजुट करने वाले इस गठजोड़ को रोकने के लिए सदस्य देशों के वित्तीय, सुरक्षा और शासन तंत्र को मजबूत करना।
दिल्ली घोषणा-पत्र की सराहना और UNSC विस्तार का प्रस्ताव
इस G-20 समिट में 2023 के दिल्ली घोषणा-पत्र की सभी सदस्य देशों ने सराहना की। इसके अलावा, UN सुरक्षा परिषद (UNSC) का विस्तार कर भारत को भी स्थायी जगह दिए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार राष्ट्रीय आपदा घोषित
G20 सम्मेलन से ठीक पहले, दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए, जिसे G20 वीमेन शटडाउन नाम दिया गया। लगातार दबाव और विरोध के बाद सरकार ने महिलाओं पर अत्याचार को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया। विरोध में शामिल महिलाएं काले कपड़े पहनकर सड़क पर उतरीं और 15 मिनट तक चुपचाप जमीन पर लेटकर विरोध जताया, जो दक्षिण अफ्रीका में हर दिन होने वाली महिलाओं की हत्याओं की संख्या को दर्शाता था।