कोलकाता: बीएलओ का प्रदर्शन, भारी वर्कलोड से तनाव; BJP बोली – ये टीएमसी के हॉकर हैं!

कोलकाता में मंगलवार को बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। लंबे समय से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के भारी कार्यभार से परेशान बीएलओ ने आरोप लगाया कि उन पर असहनीय कार्य दबाव डाला जा रहा है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन अचानक पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और जबरन बसों में भरकर ले गई। इस दौरान मौके पर काफी तनाव पैदा हो गया।

एक महिला बीएलओ ने मीडिया से कहा, “हम शांति से अपनी बात रखने आए थे। चुनाव आयोग से सिर्फ इतनी गुजारिश है कि हमें कुछ राहत दी जाए। रोजाना 10-12 घंटे तक लगातार काम करना पड़ रहा है। फील्ड वेरिफिकेशन के लिए न तो पर्याप्त समय मिल रहा है, न ही संसाधन और न ही सुरक्षा। कई साथी गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं, कुछ की तो मौत भी हो गई। मानसिक तनाव इतना बढ़ गया है कि अब सहन करना मुश्किल हो रहा है।”

इस पूरे मामले में सवाल उठता है कि क्या लोकतंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले इन कर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार जायज है?दूसरी तरफ बीजेपी नेता साजल घोष ने प्रदर्शन को पूरी तरह फर्जी और राजनीतिक करार दिया। उन्होंने दावा किया कि असली बीएलओ तो अपने काम में जुटे हैं, प्रदर्शन करने वाले मुश्किल से चार-पांच लोग थे, बाकी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हॉकर और कार्यकर्ता थे।

साजल घोष ने चुनौती देते हुए कहा, “असली बीएलओ कहां हैं? बताइए तो! राज्य में कुल 84 हजार बीएलओ हैं, इनमें से सिर्फ चार लोग ही सड़क पर उतरे हैं। बाकी सभी ड्यूटी पर हैं और काम तेजी से चल रहा है। 70% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। पहला चरण, जो 4 दिसंबर तक खत्म होना था, वह 25-26 नवंबर तक ही पूरा हो जाएगा।”

उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि प्रदर्शन करने वालों को शायद यह भी नहीं पता होगा कि एसआईआर आखिर होता क्या है। ये लोग सिर्फ टीएमसी के इशारे पर सड़क पर उतरे हैं।वहीं प्रदर्शनकारी बीएलओ ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। प्रशासन पूरे मामले पर कड़ी नजर रखे हुए है।