ममता की भाजपा को खुली चुनौती: एसआईआर से हमला हुआ तो देशभर में हिलाऊँगी नींव!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जोरदार हमला बोला है। नदिया जिले के कृष्णनगर में आयोजित रैली में उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि अगर एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) के नाम पर उन पर या बंगाल पर कोई हमला हुआ, तो वह पूरे देश में भाजपा की जड़ें हिला देंगी।

ममता ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर का इस्तेमाल सिर्फ़ उन्हें और पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। मतुआ बहुल क्षेत्र में उन्होंने भाजपा से जुड़े संगठनों पर सनसनीखेज इल्ज़ाम लगाया कि वे नागरिकता के नाम पर फर्जी प्रमाण-पत्र बाँट रहे हैं, जिसमें लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से बांग्लादेशी घोषित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “सीएए के तहत जो खुद को बांग्लादेशी बताकर आवेदन करेगा, उसे तुरंत वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया जाएगा। यह मतुआ और बंगाली भाषी समुदाय को डराने-धमकाने की साजिश है।”

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जो लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट डाल चुके हैं, अगर अब उन्हें अवैध घोषित किया जा रहा है, तो फिर केंद्र सरकार की वैधता पर सवाल नहीं उठता?

भाजपा का पलटवार तीखा

भाजपा ने ममता के बयानों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर का मकसद घुसपैठिए और फर्जी वोटरों की सफाई करना है। पार्टी प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी इसलिए बौखलाई हुई हैं क्योंकि उनकी सरकार घुसपैठियों के वोट बैंक पर टिकी है। भाजपा ने ममता के “गुजरात में भाजपा हारेगी” वाले बयान को भी राजनीतिक हताशा करार दिया।

35-36 मौतों का दावा, ममता बोलीं – कोई डरे नहीं

ममता ने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद राज्य में अब तक 35-36 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें कई ने आत्महत्या की है। उन्होंने जनता से अपील की कि डरें नहीं, कोई भी वैध मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। उन्होंने चुनाव आयोग पर “भाजपा कमीशन” होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2002 में यह प्रक्रिया तीन साल चली थी, लेकिन अब दो महीने में खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है।

13.92 लाख फॉर्म ‘अनकलेक्टेबल’

चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर के तहत अब तक 13.92 लाख फॉर्म ऐसे मिले हैं जिन्हें ‘अनकलेक्टेबल’ घोषित किया गया है। इनमें मृतक, डुप्लिकेट नाम, स्थायी रूप से बाहर गए लोग और लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता शामिल हैं। कुछ दिनों पहले यह आँकड़ा 10.33 लाख था, यानी तेज़ी से बढ़ रहा है। इस काम के लिए 80 हजार से अधिक बीएलओ तैनात हैं। प्रक्रिया के दौरान तीन बीएलओ की मौत भी हो चुकी है, जिसे लेकर टीएमसी ने आयोग पर लापरवाही और दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

28 नवंबर को आयोग से मुलाकात

विवाद बढ़ने पर चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को 28 नवंबर को दिल्ली बुलाया है। इसमें डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और साकेत गोखले जैसे नेता शामिल होंगे। टीएमसी का कहना है कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की जा रही है, जबकि भाजपा इसे पारदर्शिता का कदम बता रही है।