अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि उन्होंने जो बाइडेन के कार्यकाल में जारी कुल एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स में से 92 प्रतिशत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। ट्रम्प ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ये सभी आदेश ऑटोपेन मशीन से हस्ताक्षरित थे और बाइडेन ने इन्हें व्यक्तिगत रूप से न तो पढ़ा और न ही मंजूरी दी, इसलिए ये कानूनन अमान्य हैं।
इस कदम से बाइडेन प्रशासन की कई अहम नीतियां प्रभावित होंगी, जिनमें प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतें कम करने वाला एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14087, गरीब व अल्पसंख्यक समुदायों के लिए पर्यावरणीय न्याय से जुड़ा ऑर्डर 14096 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित व नैतिक उपयोग से संबंधित ऑर्डर 14110 भी शामिल हैं।
ट्रम्प ने बाइडेन को “स्लीपी जो” और “क्रुक्ड जो” कहते हुए खुली चेतावनी दी कि अगर बाइडेन दावा करेंगे कि उन्होंने इन दस्तावेजों को खुद अप्रूव किया था, तो उन पर शपथ के तहत झूठ बोलने (परजरी) का मुकदमा चलाया जाएगा, जिसकी सजा अमेरिकी कानून में पांच साल तक की जेल और भारी जुर्माना है।
यह फैसला व्हाइट हाउस के बाहर नेशनल गार्ड सैनिकों पर हालिया हमले के कुछ दिनों बाद आया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सैकड़ों दस्तावेजों पर हस्ताक्षर की वैधता की जांच बेहद जटिल होगी और यह साफ नहीं है कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
गौरतलब है कि ऑटोपेन का इस्तेमाल थॉमस जैफरसन से लेकर रोनाल्ड रीगन, बिल क्लिंटन, जॉर्ज बुश, बराक ओबामा और खुद ट्रम्प तक सभी राष्ट्रपतियों ने बड़ी संख्या में नियमित दस्तावेजों पर किया है, लेकिन ट्रम्प अब इसे बाइडेन के खिलाफ हथियार बना रहे हैं। इस पूरे मामले ने अमेरिकी राजनीति में नया और तीखा विवाद खड़ा कर दिया है।