मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में पानी में बैक्टीरिया के कारण फैली बीमारी से मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों के दावों के अनुसार, अब तक 14 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जबकि आधिकारिक रूप से चार मौतों की पुष्टि की गई है। ताजा मामलों में 15वीं मौत की खबरें आ रही हैं, जो पाइपलाइन में लीकेज से सीवेज के मिश्रण के कारण हुई मानी जा रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में स्वत संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है, वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में आज इस मुद्दे पर सुनवाई होनी है।
यह संकट इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां नर्मदा नदी से आने वाली मुख्य पाइपलाइन में लीकेज पाया गया। जांच में पता चला कि पाइपलाइन के ऊपर एक टॉयलेट बना हुआ था, जिसका कचरा सीधे एक गड्ढे में गिरता था, बिना किसी उचित सेप्टिक टैंक के। इससे सीवेज का पानी पेयजल में मिल गया, जिससे बैक्टीरिया फैल गया। लैब रिपोर्ट्स में 26 पानी के सैंपलों में बैक्टीरियल कंटैमिनेशन की पुष्टि हुई है, जो सीवर के पानी से मिलते-जुलते हैं। निवासियों ने पानी में बदबू की शिकायत 25 दिसंबर से की थी, लेकिन शुरुआती दिनों में इसे नजरअंदाज किया गया, जिससे स्थिति बिगड़ गई।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 272 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से 71 को डिस्चार्ज किया गया है, जबकि 201 का इलाज जारी है। कुल 12,000 से ज्यादा लोगों की जांच की गई है। मौतों की संख्या को लेकर विवाद है, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चार मौतों की बात कही है, जबकि महापौर ने सात का आंकड़ा दिया। स्थानीय लोग 14 मौतों का दावा कर रहे हैं, और हालिया रिपोर्ट्स में नौ मौतों का जिक्र है। जांच में पाइपलाइन की मरम्मत में देरी और अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, जिसके चलते एक अधिकारी को बर्खास्त किया गया और दो को सस्पेंड किया गया।
प्रशासन की ओर से तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। इंदौर नगर निगम (IMC) ने लीकेज की मरम्मत की और पाइपलाइन को फ्लश किया। निवासियों को शुक्रवार तक नल का पानी इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है, और इलाके में 60-70 वॉटर टैंकरों से पीने का पानी पहुंचाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर नए मामलों की निगरानी कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को दो लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जो आईएएस अधिकारी नवजीवन पंवार की अगुवाई में काम कर रही है।
NHRC ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर सात मौतों और 40 से ज्यादा लोगों के बीमार होने पर स्वत संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें प्रभावितों की संख्या, चिकित्सा सुविधाएं और रोकथाम के उपाय शामिल हैं। वहीं, हाईकोर्ट में इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी द्वारा दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई है। कोर्ट ने पहले ही साफ पानी की आपूर्ति और मरीजों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, और आज स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाएगी।