शहर के घनी आबादी वाले भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल पाइपलाइन में सीवरेज का पानी मिलने से फैले संक्रमण ने अब तक 16 लोगों की जान ले ली है। स्थानीय निवासियों और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार मौतों की संख्या इससे अधिक हो सकती है, जबकि सरकारी आंकड़े कम बता रहे हैं। 150 से ज्यादा मरीज अभी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है।
संक्रमण का मुख्य कारण: पाइपलाइन लीकेज और सीवर मिश्रण
जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बनी पाइपलाइन में रिसाव हुआ, जिससे सार्वजनिक शौचालय का गंदा पानी नर्मदा जल की मुख्य लाइन में घुस गया। लैब टेस्ट में पानी के नमूनों में ई-कोलाई, शिगेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले, जो उल्टी-दस्त और गंभीर डायरिया का कारण बनते हैं। निवासियों ने महीनों पहले बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। एमजीएम मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और राहत कार्य
स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में सर्वे शुरू किया, जिसमें हजारों घरों की जांच हुई और नए मरीजों को तुरंत इलाज उपलब्ध कराया गया। गंभीर मरीजों को आईसीयू से एकत्रित कर बॉम्बे हॉस्पिटल जैसे बड़े केंद्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है। अन्य जिलों से अतिरिक्त डॉक्टर बुलाए गए हैं, दवाओं और टेस्ट किट की आपूर्ति बढ़ाई गई है। पाइपलाइन की मरम्मत हो चुकी है, क्लोरीनेशन बढ़ाया गया और टैंकरों से साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। कलेक्टर ने खुद टैंकर का पानी पीकर लोगों का विश्वास जगाने की कोशिश की।
कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कोलरा एंड एंटरिक डिजीज (एनआईसीईडी, पूर्व में बैक्टीरियोलॉजी इंस्टीट्यूट) की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंची है। टीम ने क्षेत्र से पानी के नए सैंपल लिए हैं और बैक्टीरिया के प्रकार, स्रोत तथा फैलाव की विस्तृत जांच कर रही है। भोपाल एम्स की टीम भी लीकेज स्थलों का निरीक्षण कर रही है।
राजनीतिक विवाद और जवाबदेही की मांग
इस हादसे ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंत्री के इस्तीफे और जांच की मांग की है। प्रभावितों से मिलने गई जांच टीम के साथ धक्कामुक्की हुई। सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिया है, लेकिन कई परिवार इसे अपर्याप्त बता रहे हैं। कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और जांच समिति गठित हुई है।
व्यापक समस्या की झलक
यह संकट केवल भागीरथपुरा तक सीमित नहीं है। शहर के कई इलाकों में पुरानी पाइपलाइनों की वजह से दूषित पानी की शिकायतें आम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रखरखाव और निगरानी की कमी बड़ी वजह है। प्रशासन ने पूरे शहर में पानी की जांच तेज कर दी है ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।पीड़ित परिवार गम और गुस्से में हैं। एक नवजात शिशु सहित कई निर्दोष जानें गईं। उम्मीद है कि जांच से जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी और शहर की पेयजल व्यवस्था मजबूत बनेगी। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।