अब अदालत में ‘वकील’ की भूमिका में दिखेंगी ममता; SIR के खिलाफ खुद करेंगी जिरह, सुवेंदु ने बताया ‘हार का डर’

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अनोखा मोड़ देखने को मिलने वाला है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि वह मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के खिलाफ खुद अदालत के कटघरे में खड़े होकर जिरह करेंगी। गंगासागर की जनसभा में उन्होंने साफ कर दिया कि मंगलवार को कोर्ट खुलते ही उनकी पार्टी नई अर्जी लगाएगी, जहाँ वे अपनी एलएलबी (LLB) की डिग्री का इस्तेमाल करते हुए खुद दलीलें पेश करेंगी।

कोर्ट रूम में ममता: राजनीतिक और कानूनी दांव

ममता बनर्जी का आरोप है कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया ‘अमानवीय’ और ‘दोषपूर्ण’ है। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी सत्यापन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का दावा है कि सर्वर डाउन होने और तकनीकी खामियों की वजह से असली मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। खुद केस लड़ने के फैसले के पीछे उनका मकसद यह जताना है कि वे बंगाल के लोगों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर अदालत तक अकेले लड़ने का माद्दा रखती हैं।

सुवेंदु अधिकारी का हमला: ‘फर्जी वोटर्स बचाने की छटपटाहट’

विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के इन आरोपों को पूरी तरह ‘मनगढ़ंत’ करार दिया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर दावा किया कि:

सुवेंदु के मुताबिक, टीएमसी ने सालों से ‘भूत’ (फर्जी) और अवैध घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट में भर रखे हैं। SIR इसी ‘गंदगी’ को साफ करने की पारदर्शी राष्ट्रीय पहल है।

बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि 2026 चुनाव से पहले फर्जी वोटर्स के पकड़े जाने के डर से ममता बनर्जी डरी हुई हैं। उन्होंने कहा कि 50 हजार प्रशिक्षित अधिकारी इस काम को पूरी पारदर्शिता से कर रहे हैं।

 2026 चुनाव का सियासी भविष्य

2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह कानूनी लड़ाई बेहद अहम मानी जा रही है। ममता बनर्जी इसे जनता के उत्पीड़न का मुद्दा बना रही हैं, जबकि बीजेपी इसे ‘क्लीन इलेक्शन’ (साफ-सुथरे चुनाव) की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। मंगलवार को जब ममता बनर्जी खुद अदालत में जिरह करेंगी, तो पूरे देश की नजरें इस ऐतिहासिक कानूनी बहस पर टिकी होंगी।