प्रशासन को स्वीकारना पड़ी 14 मौतें, हाईकोर्ट में सुनवाई आज

इंदौर के भागीरथपुरा की भयावह घटना ने प्रशासनिक तंत्र की कई कमजोर कड़ियों को एक साथ उजागर कर दिया है। समन्वय और सामंजस्य की कमी, समय रहते अनदेखी और पूर्व की घटनाओं से सबक न लेने का नतीजा यह हुआ कि दूषित पानी के कारण अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने अब तक इनमें से 14 मौतों को स्वीकार किया है।

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों के मामले में प्रशासनने 14 लोगों की मौत को स्वीकार कर लिया है। जांच कमेटी ने रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें 14 लोगों के नाम शामिल हैं और 2 के नामों को शामिल नहीं किया गया है। कई संस्थाओं के सर्वे में 16 लोगों की मौत बताईगई थी जिसके बाद प्रशासन और सरकार के द्वारा अलग अलग आंकड़े आ रहे थे। सोमवार को भी एक व्यक्ति की मौत हुई है जिसके बाद संस्थाओं द्वारा दी गई सूची के हिसाब से यह आंकड़ा 17 हो गया है। अब आज हुई मौत के कारणों के बारे में भी जांच कमेटी दस्तावेजों को देखेगी। यदि जल संक्रमण की वजह से मौत होना बताया जाएगा तो इसे भी सरकारी आंकड़ों में दर्ज किया जाएगा।

दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अस्पतालों में 110 मरीज भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। इनमें से 311 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज चल रहा है। इस मामले को लेकर एमपी हाईकोर्ट में दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी। वहीं, कांग्रेस शहर के सभी 85 वार्डों में कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन करेगी।