भोपाल: ईरानी डेरे के 6 गैंग का खुलासा, मुख्य सरगना राजू पुलिस की पकड़ से बाहर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के निशातपुरा इलाके में अमन कॉलोनी का ईरानी डेरा लंबे समय से संगठित अपराध का केंद्र बना हुआ है। यहां कई आपराधिक समूह सक्रिय हैं, जो चोरी, लूटपाट, ठगी और फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को लूटने जैसे कामों में लिप्त हैं। इन समूहों का मुख्य संरक्षक कुख्यात राजू ईरानी है, जो पुलिस की बड़ी कार्रवाई के बावजूद फरार चल रहा है।

अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना बना डेरा

ईरानी डेरे में रहने वाले अधिकांश परिवारों के सदस्यों का आपराधिक इतिहास रहा है। यहां के लोग देश के विभिन्न राज्यों में जाकर अपराध करते हैं और वापस लौटकर छिप जाते हैं। ये गिरोह अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई, सेल्स टैक्स या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों से पैसे और सामान ठगते हैं। कुछ मामलों में वे फर्जी पत्रकार बनकर भी धमकी देते हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि ये समूह महीनों तक घर से दूर रहकर ‘सफर’ पर अपराध करते हैं और लूट का माल डेरे तक पहुंचाते हैं।

इस नेटवर्क का विस्तार मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश समेत करीब एक दर्जन राज्यों तक है। गिरोह के सदस्य वारदात के बाद नर्मदापुरम, देवास, मुंबई, बेंगलुरु या दिल्ली जैसे स्थानों पर छिपते हैं। बदले में अन्य राज्यों के अपराधी यहां पनाह लेते हैं।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई और विरोध

दिसंबर 2025 के अंत में भोपाल पुलिस ने डेरे पर बड़ी छापेमारी की। करीब 150 जवानों की टीम ने तड़के दबिश दी, जिसमें महिलाओं और स्थानीय लोगों ने पथराव और झूमाझटकी की। इसके बावजूद पुलिस ने 22 पुरुषों और 10 महिलाओं समेत कुल 32 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। इनमें से कई अन्य राज्यों में वांटेड थे। बरामदगी में कई मोबाइल फोन, बाइक्स, नकली हथियार और फर्जी दस्तावेज शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हुए। गिरफ्तार लोगों में रिजवान हुसैन, गुलाम उर्फ काकड़ी जैसे नाम शामिल हैं। मुख्य आरोपी राजू ईरानी और उसके करीबी सालिक, गुलाब, सबदर समेत कई लोग फरार हो गए। उनकी तलाश में छह राज्यों की पुलिस भोपाल में सक्रिय है।

प्रशासन की सख्ती और आगे की योजना

प्रशासन अब डेरे में बने मकानों की जांच कर रहा है। अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने और राजू की संपत्ति जब्त करने की तैयारी है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ से कई बड़े खुलासे हो रहे हैं और पूरा नेटवर्क जल्द ध्वस्त किया जाएगा। पहले भी दिल्ली पुलिस ने इस गिरोह के दो सदस्यों को मुठभेड़ में पकड़ा था।

यह डेरा 2014 में हुई हिंसा और आगजनी की घटना के बाद से चर्चा में रहा है। अब पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से यहां अपराध पर लगाम लगने की उम्मीद है। शहरवासी इस कार्रवाई से राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी तक चुनौती बनी हुई है।