देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक दस्तावेज यानी आम बजट 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी रूपरेखा तैयार कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) ने संसद के बजट सत्र के लिए 28 जनवरी की तारीख का प्रस्ताव दिया है। इस बार बजट को लेकर खास बात यह है कि 1 फरवरी को रविवार होने के बावजूद सरकार बजट की तारीख में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है।
परंपरा और रविवार का संयोग
आमतौर पर रविवार को संसद में अवकाश रहता है, लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि बजट डे की गरिमा और तय प्रक्रिया को देखते हुए 1 फरवरी की तारीख को फिक्स रखा गया है। सत्र की शुरुआत के लिए सरकार के पास 28 जनवरी और 31 जनवरी के दो विकल्प थे, जिनमें से 28 जनवरी पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है।
2017 से बदला था बजट का कैलेंडर
भारत में बजट पेश करने के इतिहास में साल 2017 एक बड़ा मोड़ था। इससे पहले बजट फरवरी के अंतिम दिन पेश किया जाता था। सरकार ने इस नियम को निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए बदला था:
1 फरवरी को बजट पेश करने से सरकार को 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले खर्चों और विधायी प्रक्रियाओं को संसद से मंजूर कराने के लिए पर्याप्त समय (करीब दो महीने) मिल जाता है। इसके कारण मंत्रालयों और विभागों को साल के पहले दिन से ही आवंटित बजट का उपयोग करने की सुविधा मिल जाती है।
सत्र का संभावित कार्यक्रम
यदि 28 जनवरी से सत्र शुरू होता है, तो राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद सरकार आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश करेगी। इसके बाद 1 फरवरी को वित्त मंत्री संसद के पटल पर देश का लेखा-जोखा रखेंगी। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा होना बाकी है, लेकिन वित्त मंत्रालय में बजट पूर्व बैठकों का दौर अंतिम चरण में पहुंच चुका है।