चंडीगढ़ के सेक्टर-22 से जुड़े तेंदुए की खाल तस्करी के हाई-प्रोफाइल मामले की जांच अब दिल्ली सीबीआई के सुपुर्द कर दी गई है। चंडीगढ़ वन विभाग की सिफारिश पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने राजस्थान निवासी आरोपी विक्रम सिंह बघेल और अवधेश चौधरी के खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस मामले की चार्जशीट चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश की जाएगी, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
तस्करी के इस बड़े गिरोह का भंडाफोड़ पिछले साल सितंबर में हुआ था, जब डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) और मुंबई कस्टम्स ने एक संयुक्त गुप्त ऑपरेशन चलाया था। सुरक्षा एजेंसियों ने ग्राहक बनकर सेक्टर-22 स्थित सूद धर्मशाला में आरोपियों से संपर्क साधा और जैसे ही सौदे की बात पक्की हुई, दोनों तस्करों को तेंदुए की खाल के साथ रंगे हाथों दबोच लिया गया। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह हिमाचल प्रदेश के जंगलों से संरक्षित जीवों की खालें लाकर देश के विभिन्न हिस्सों में मोटी रकम के बदले बेचता था।
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के तहत तेंदुआ शेड्यूल-1 का प्राणी है, जिसे भारत में सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। कानून के मुताबिक तेंदुए का शिकार या उसके शरीर के अंगों का व्यापार करना एक गंभीर अपराध है, जिसमें दोषी पाए जाने पर सात साल तक की कड़ी कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है। सीबीआई अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि हिमाचल के किन दुर्गम इलाकों में अवैध शिकार को अंजाम दिया गया और इस नेटवर्क में कितने प्रभावशाली लोग शामिल हैं।