मकर संक्रांति पर सुलह के संकेत: 8 महीने बाद तेजप्रताप के दही-चूड़ा भोज में पहुंचे लालू, बोले- ‘अब साथ रहेंगे’

बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का त्योहार इस बार सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक भावुक पारिवारिक मिलन का मौका बन गया। जन शक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप यादव ने अपने आवास पर आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने करीब 8 महीने पुरानी पारिवारिक और राजनीतिक दरार को पाटने की दिशा में बड़ा कदम दिखाया। लालू ने स्पष्ट कहा कि वे तेजप्रताप से नाराज नहीं हैं और बेटा हमेशा परिवार के साथ रहेगा।

लालू का आगमन और भावुक पल

तेजप्रताप ने एक दिन पहले यानी 13 जनवरी को राबड़ी आवास जाकर पिता लालू प्रसाद यादव, मां राबड़ी देवी और भाई तेजस्वी यादव को भोज के लिए व्यक्तिगत निमंत्रण दिया था। यह मुलाकात कई महीनों बाद हुई, जिसमें तेजप्रताप ने भतीजी कात्यायनी को गोद में लेकर दुलार भी किया। भोज में लालू सबसे पहले पहुंचे, जहां उन्होंने तेजप्रताप को आशीर्वाद दिया और कहा, “मैं तेजप्रताप से नाराज नहीं हूं। बेटा हमेशा बेटा होता है, वो परिवार के साथ ही रहेंगे।” भाजपा में जाने की अफवाहों पर लालू ने कहा कि बेटे को उनका आशीर्वाद हमेशा मिलेगा।

कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मामा साधु यादव, प्रभुनाथ यादव और अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए। साधु यादव ने परिवार की एकता पर जोर देते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि लालू परिवार फिर से पूरी तरह एकजुट हो जाए। तेजप्रताप ने पिता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया, जिससे मंच पर पिता-पुत्र का स्नेह साफ नजर आया।

तेजस्वी-राबड़ी की गैरमौजूदगी और तेजप्रताप का तंज

भोज की सबसे बड़ी बात रही छोटे भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी की अनुपस्थिति। तेजप्रताप ने पत्रकारों से बातचीत में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “हमारे भाई थोड़ा लेट से सोकर उठते हैं, शायद बाद में आएंगे।” हालांकि, खबर लिखे जाने तक दोनों नहीं पहुंचे। तेजस्वी ने घर पर ही दही-चूड़ा का आनंद लिया। यह अनुपस्थिति परिवार में अभी बची हुई कुछ खींचतान को दर्शाती है, जो पिछले साल मई में एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुई थी, जिसके चलते लालू ने तेजप्रताप को पार्टी और घर से अलग कर दिया था।

सियासी निहितार्थ और नई अटकलें

यह आयोजन बिहार की सियासत के लिए खास महत्व रखता है। लालू की मौजूदगी ने ‘घर वापसी’ की चर्चाओं को हवा दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा कि मकर संक्रांति से नए समीकरण बनेंगे और बिखरा परिवार फिर एकजुट होगा। विश्लेषकों का मानना है कि तेजप्रताप ने सत्ता और विपक्ष दोनों के नेताओं को न्योता देकर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निमंत्रण था, लेकिन उनकी उपस्थिति नहीं हुई।