भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में ताजा सकारात्मक हलचल देखने को मिल रही है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री (स्टेट सेक्रेटरी) मार्को रुबियो के बीच हुई फोन वार्ता ने व्यापारिक गतिरोध को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर लंबे समय से चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।
जयशंकर ने अपनी पोस्ट में बताया कि बातचीत “अच्छी” रही और इसमें व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, नागरिक परमाणु सहयोग, रक्षा तथा ऊर्जा क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इन मुद्दों पर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। अमेरिकी विदेश विभाग के बयान में भी कहा गया कि दोनों नेताओं ने चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया, साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मुक्त और खुली व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
यह वार्ता पिछले कुछ महीनों से चले आ रहे व्यापारिक तनाव के बीच हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत पर उच्च टैरिफ लगाए गए हैं, जिनमें रूसी तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त शुल्क भी शामिल हैं। इन टैरिफों के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी, लेकिन नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में कहा कि व्यापार मुद्दों पर संपर्क जारी रहेगा और अगले महीने उच्च स्तरीय बैठकें हो सकती हैं।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत ऊर्जा और रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाने को तैयार दिख रहा है, जबकि अमेरिका भारतीय बाजार में अपनी कंपनियों के लिए बेहतर अवसर और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फोन वार्ता व्यापार समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत है। हालांकि, टैरिफ नीतियों में ढील और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर अभी और बातचीत की जरूरत है। दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक हितों का संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा।