SMS अस्पताल का नया ICU बना ‘वॉटरफॉल’; 7 महीने में ही निर्माण की खुली पोल, 10 बेड बंद

राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सवाई मानसिंह (SMS) की नई बनी इमारतों के निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले साल मई-जून में बनकर तैयार हुआ मुख्य भवन का 2DE ICU वार्ड अब पानी के रिसाव (सीपेज) का केंद्र बन गया है। आलम यह है कि करोड़ों के बजट से बने इस हाई-टेक वार्ड की छतों से लगातार पानी टपक रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका है।

10 बेड हुए बेकार, स्टाफ में करंट का खौफ

वार्ड में काम करने वाले स्टाफ ने बताया कि पिछले कई महीनों से रिसाव इतना अधिक है कि 10 बेडों पर मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया गया है। स्टाफ सदस्यों ने डर जाहिर किया है कि अगर पानी बिजली की लाइनों तक पहुँचा, तो शॉर्ट सर्किट से आग लग सकती है। इसी सुरक्षा डर के कारण स्टाफ ने उस क्षेत्र में बैठना भी छोड़ दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल ट्रॉमा सेंटर के न्यूरोसर्जरी ICU में लगी आग का मुख्य कारण भी पानी का रिसाव और स्पार्किंग ही पाया गया था।

अधिकारियों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के आरोप

हैरानी की बात यह है कि PWD और अस्पताल प्रशासन को बार-बार सूचित करने के बावजूद इस समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। डॉक्टरों की कमेटी ने शुरुआत में ही इस वार्ड के निर्माण की गुणवत्ता पर आपत्ति जताते हुए हैंडओवर लेने से दो बार मना कर दिया था। हालांकि, आरोप है कि तत्कालीन अधीक्षक के दबाव में नियमों को ताक पर रखकर इस घटिया निर्माण को स्वीकार कर लिया गया।

महज 7 महीने में खुली पोल

30 से अधिक बेड की क्षमता वाले इस ICU को जून के अंत में डॉक्टरों की टीम को सौंपा गया था। निर्माण पूरा होने के मात्र 7 महीने के भीतर ही छतों का टपकना और दीवारों में सीलन आना PWD की कार्यशैली और ठेकेदारों की साठगांठ पर बड़े सवाल खड़े करता है। ट्रॉमा सेंटर के पोलीट्रोमा ICU में हाल ही में हुए जलजमाव के बाद, मुख्य भवन की यह घटना अस्पताल के बुनियादी ढांचे की पोल खोल रही है।