राजस्थान के टॉप-10 वांटेड अपराधियों में शुमार और MD ड्रग्स के मास्टरमाइंड रमेश कुमार विश्नोई ने एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 12वीं फेल होने के बावजूद रमेश ने अपनी चालाकी और तकनीक के दम पर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया था।
गूगल से खोजता था खुफिया लैब की जगह
पूछताछ में रमेश ने बताया कि वह ड्रग्स बनाने के लिए सुरक्षित और खुफिया जगहों की तलाश गूगल मैप्स के जरिए करता था। वह सुनसान इलाकों में बने छोटे कमरों को निशाना बनाता था। मकान मालिक को खुद को केमिकल बिजनेसमैन बताकर और ‘रिसर्च’ का बहाना बनाकर वह 1.50 लाख रुपए प्रति महीना तक किराया देता था। शक से बचने के लिए वह एक जगह पर केवल दो महीने रुकता और 40-50 किलो ड्रग्स बनाकर ठिकाना बदल देता था।
जेल में मिला ‘गुरु’ और ड्रग्स का फॉर्मूला
रमेश की जिंदगी महाराष्ट्र की जेल में बंद डॉ. बीरजू से मिलने के बाद बदल गई। बीरजू ने ही उसे MD ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला दिया और ‘गुरु दक्षिणा’ के बदले एक केमिस्ट भी उपलब्ध कराया। रमेश ने बताया कि 1 किलो MD बनाने में मात्र 1 लाख रुपए का खर्च आता था, जिसे वह बाजार में 29 लाख रुपए के भारी मुनाफे पर बेचता था। इसी काली कमाई से उसने राजस्थान में 25 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति (फार्म हाउस, मार्बल फैक्ट्री और मकान) बना ली।
टेक्नोलॉजी और लग्जरी लाइफ का तालमेल
गिरफ्तारी से बचने के लिए रमेश बेहद शातिर तरीके अपनाता था। उसने दावा किया कि वह अपनी पत्नी से रोज बात करता था, लेकिन ऐसी तकनीक (एन्क्रिप्टेड माध्यम) का इस्तेमाल करता था जिसे कोई एजेंसी ट्रैक नहीं कर सकती। वह हर 10 दिन में अपना मोबाइल और सिम बदल देता था। पुलिस की नाकाबंदी से बचने के लिए वह सड़क के बजाय हमेशा हवाई यात्रा (Air Travel) ही करता था।
कोलकाता में वेश बदलकर रह रहा था
दिसंबर 2025 से रमेश कोलकाता में पहचान छिपाकर रह रहा था। वहां उसने खुद को एक केमिस्ट्री टीचर और बिजनेसमैन के रूप में स्थापित कर लिया था और किसी नए अवैध धंधे की जमीन तैयार कर रहा था। AGTF और ANTF की संयुक्त टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे कोलकाता के एक लग्जरी फ्लैट से दबोचा। उसके खिलाफ अब तक 36 आपराधिक मामले दर्ज हैं।