सुनीता विलियम्स NASA से रिटायर, 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए

भारतीय मूल की मशहूर अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा से अलविदा कह दिया है। नासा ने आधिकारिक रूप से बताया कि 27 वर्षों की लंबी सेवा के बाद उनकी सेवानिवृत्ति 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो गई है। यह खबर तब आई जब सुनीता वर्तमान में भारत भ्रमण पर हैं और अपने पैतृक देश से जुड़ी यादों को ताजा कर रही हैं।

1998 में नासा में शामिल हुईं सुनीता ने अपने करियर में तीन प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों में भाग लिया और कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। उन्होंने 9 स्पेसवॉक (अंतरिक्ष में बाहर निकलकर कार्य) किए, जो कुल 62 घंटे 6 मिनट तक चले। यह किसी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे अधिक समय है और नासा के पूरे इतिहास में चौथा सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। साथ ही, वे अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ पूरी करने वाली पहली व्यक्ति बनीं, जो उनकी शारीरिक और मानसिक मजबूती का प्रतीक है।

अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहियो में हुआ। उनके पिता दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के झुलासन गांव से थे, जबकि मां उर्सुलिन बोनी पंड्या स्लोवेनियाई मूल की थीं।

उनका आखिरी मिशन उनके करियर का सबसे कठिन दौर साबित हुआ। जून 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल की पहली क्रूड टेस्ट फ्लाइट पर वे बुच विलमोर के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंची थीं। यह मिशन सिर्फ 8-10 दिनों का था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण वे वहां लगभग 9 महीने तक फंस गईं। मार्च 2025 में स्पेसएक्स के क्रू-9 मिशन से वे सुरक्षित पृथ्वी पर लौटीं।

नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजैकमैन ने उनकी विदाई में कहा कि सुनीता ने आईएसएस पर अपने नेतृत्व से भविष्य के मिशनों को नई दिशा दी है। उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी को बड़े सपने देखने और सीमाओं को पार करने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

सेवानिवृत्ति के बाद भारत पहुंची सुनीता ने दिल्ली में दिवंगत भारतीय अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात की। कल्पना की मां संयोगिता और बहन दीपा से मिलकर वे भावुक हो गईं और कहा कि वे उनके साथ नियमित संपर्क में रहेंगी। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत आना उनके लिए हमेशा ‘घर वापसी’ जैसा लगता है। अंतरिक्ष से उन्होंने सबसे पहले भारत और स्लोवेनिया को ढूंढने की कोशिश की थी।

उन्होंने आईएसएस के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां रूस, जापान, यूरोप और कनाडा जैसे देशों के साथी थे। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से न मिल पाने का अफसोस भी जताया। सुनीता ने अंतरिक्ष में मानसिक स्वास्थ्य, स्पेस डेब्री प्रबंधन और अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार रखे।