अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दावोस दौरे की शुरुआत नाटकीय रही, जहां वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल होने के लिए उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद उनके विमान में तकनीकी खराबी आ गई। व्हाइट हाउस के मुताबिक, टेकऑफ के बाद एयर फोर्स वन में मामूली इलेक्ट्रिकल खराबी का पता चलने पर एहतियातन विमान को वापस वॉशिंगटन बुलाया गया, जिसके बाद ट्रम्प दूसरे विमान से स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हुए। ज्ञात हो कि वर्तमान एयर फोर्स वन विमान करीब चार दशक पुराने हैं और नए विमानों के प्रोजेक्ट में लगातार देरी हो रही है।
राष्ट्रपति ट्रम्प बुधवार शाम करीब 7 बजे दुनिया को संबोधित करेंगे, जहां उनके एजेंडे में सबसे ऊपर ग्रीनलैंड का भविष्य और रणनीतिक सुरक्षा का मुद्दा शामिल है। हाल ही में उन्होंने एक मानचित्र साझा किया था जिसमें ग्रीनलैंड, कनाडा और वेनेजुएला को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया था, जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने यूरोप और बाकी दुनिया को टैरिफ को लेकर सख्त चेतावनी दी है, जिसके तहत कई यूरोपीय देशों पर पहले ही 10% टैरिफ लगाया जा चुका है। ट्रम्प का यह रुख साफ करता है कि वे व्यापार को अब कूटनीति और दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
भारत के नजरिए से यह दौरा बेहद अहम है क्योंकि ट्रम्प दावोस में एक विशेष उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी करेंगे, जिसमें भारत के 7 दिग्गज कारोबारी नेताओं को आमंत्रित किया गया है। भारत से भी चार केंद्रीय मंत्री, छह राज्यों के मुख्यमंत्री और 100 से ज्यादा कारोबारी इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। छह साल बाद दावोस के मंच पर लौट रहे ट्रम्प ने इस बार अमेरिका के लिए एक अलग ‘USA हाउस’ भी बनवाया है। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया सप्लाई चेन, तकनीक और निवेश पर नए सिरे से फैसले ले रही है, जिससे ट्रम्प के हर बयान का सीधा असर ग्लोबल मार्केट और निवेश पर पड़ने की उम्मीद है।