राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित कंसल्टेंसी फर्म I-PAC एक बड़े वित्तीय विवाद में घिर गई है। हालिया वित्तीय खुलासों से यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई है, संस्था ने साल 2021 में हरियाणा के रोहतक स्थित ‘रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया (पी) लिमिटेड’ नामक कंपनी से ₹13.5 करोड़ का असुरक्षित ऋण लिया था। हालांकि, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के आधिकारिक आंकड़ों की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य मिला है, यह कंपनी कर्ज देने से करीब तीन साल पहले, अगस्त 2018 में ही सरकारी रिकॉर्ड से ‘स्ट्रक ऑफ’ (बंद) की जा चुकी थी।
अस्तित्वहीन कंपनी और फर्जी संपर्क नंबर का रहस्य
इस पूरे मामले में सबसे रहस्यमयी पहलू यह है कि जो कंपनी कागजों में 2018 में ही खत्म हो गई थी, उसने 2021 में इतनी बड़ी राशि का कर्ज कैसे और किस माध्यम से दिया। जांच के दौरान जब कंपनी के ऑनलाइन सूचीबद्ध संपर्क नंबर पर संपर्क किया गया, तो वहां से किसी भी प्रकार के जुड़ाव से साफ इनकार किया गया। इसके अलावा, कंपनी के पूर्व शेयरधारकों ने भी I-PAC को किसी भी तरह का फंड देने की जानकारी होने से मना कर दिया है।
फंडिंग के स्रोत पर उठे गंभीर सवाल
यद्यपि I-PAC के वित्तीय विवरण दर्शाते हैं कि संस्था ने इस कर्ज का कुछ हिस्सा चुका दिया है, लेकिन एक बड़ी रकम अब भी बकाया है। कागजों पर अस्तित्व खो चुकी एक निष्क्रिय फर्म से करोड़ों का फंड मिलने के इस खुलासे ने राजनीतिक गलियारों और कॉर्पोरेट जगत में हड़कंप मचा दिया है। अब इस बात को लेकर पारदर्शिता और फंड के वास्तविक स्रोत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब फिलहाल I-PAC की ओर से नहीं आया है।