नोएडा में 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी में डूबने से हुई मौत के मामले में शासन द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। नोएडा प्राधिकरण और पुलिस विभाग द्वारा सौंपी गई कुल 600 पन्नों की रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद SIT इस नतीजे पर पहुंची है कि यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि पूरी तरह से सिस्टम की विफलता का परिणाम था। जांच के दौरान जब अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन में हुई 2 घंटे की देरी पर सवाल किया गया, तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। अब यह विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
प्राधिकरण और जिला प्रशासन की बड़ी लापरवाही
जांच रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा शहर के रखरखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी प्राधिकरण के सीईओ की होती है, लेकिन हादसे वाले स्थान पर रोड कट और ड्रेनेज के काम में बरती गई लापरवाही के चलते तत्कालीन सीईओ लोकेश एम. को पहले ही पद से हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। इसी तरह, जिलाधिकारी मेधा रूपम की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि जिला आपदा प्रबंधन की प्रमुख होने के बावजूद उन्होंने न तो समय पर विभागीय कार्रवाई की और न ही हादसे के बाद पीड़ित परिवार से संपर्क साधा। अग्निशमन विभाग के प्रमुख यानी चीफ फायर ऑफिसर (CFO) की लापरवाही भी सामने आई है, जिनकी टीम ने मौके पर यह कहकर हाथ खड़े कर दिए थे कि उन्हें तैरना नहीं आता और उनके पास जरूरी उपकरण नहीं हैं।
पुलिस और ड्रेनेज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
क्षेत्रीय पुलिस और ट्रैफिक विभाग की कार्यप्रणाली को भी SIT ने अपनी रिपोर्ट में कटघरे में खड़ा किया है। एसएचओ सर्वेश सिंह ने न तो मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू का नेतृत्व किया और न ही समय रहते NDRF को सूचना दी। वहीं, ट्रैफिक सेल के जीएम एसपी सिंह ब्लैक स्पॉट पर रिफ्लेक्टर और सुरक्षा बोर्ड लगाने में विफल रहे, जबकि जल सीवर विभाग के जीएम आरपी सिंह ने टूटी हुई ड्रेनेज लाइन को ठीक करने की सुध नहीं ली। इसी टूटी लाइन के कारण उस निजी प्लॉट में 12 सोसायटियों के सीवर का पानी जमा हो गया था, जहाँ युवराज की कार गिरी थी।
बिल्डरों पर कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
इस मामले में अब तक चार बिल्डरों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें उस प्लॉट का मालिक अभय कुमार भी शामिल है जिसने बेसमेंट का गड्ढा असुरक्षित छोड़ दिया था। SIT की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि इन अधिकारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन किया होता और समय पर रेस्क्यू शुरू होता, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री के कार्यालय पर टिकी हैं, जहाँ से रिपोर्ट के आधार पर अंतिम कार्रवाई के आदेश जारी होने की उम्मीद है।