राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान जर्जर स्कूल भवनों की खस्ताहाली को लेकर भारी हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की हालत इतनी दयनीय है कि कई बच्चे मंदिरों और मुर्गी फार्म जैसे असुरक्षित स्थानों पर बैठने को मजबूर हैं। विपक्ष के इन आरोपों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सदन में एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चिन्हित किए गए सभी 1,800 जर्जर स्कूल भवनों को तत्काल जमींदोज (ध्वस्त) किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि वार्षिक परीक्षाएं नजदीक हैं और छात्रों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने घोषणा की कि अब सभी स्कूल भवनों का थर्ड पार्टी ऑडिट पॉलिटेक्निक कॉलेजों के माध्यम से कराया जाएगा। इसके साथ ही, निर्माण और मरम्मत के कार्यों के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी ताकि अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके।
रोडवेज डिपो की घोषणाओं पर सदन में तीखी नोकझोंक
सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस शासन में घोषित छह रोडवेज डिपो को शुरू न करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और विधायक अमित चाचाण ने परिवहन मंत्री से सवाल किया कि इन डिपो को चालू करने में देरी क्यों की जा रही है।
इस पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम और परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बिना किसी वित्तीय प्रावधान या बजट आवंटन के केवल चुनावी लाभ के लिए ‘खाली घोषणाएं’ की थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार केवल उन्हीं योजनाओं को आगे बढ़ाएगी जिनके लिए पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था होगी। सरकार के इस कड़े रुख और जर्जर भवनों को गिराने के फैसले के बीच सदन की कार्यवाही काफी गर्मागर्मी के साथ संपन्न हुई।