मध्य प्रदेश सरकार अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ को लॉन्च करने से पहले परिवहन नियमों में आमूल-चूल बदलाव करने जा रही है। मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई वरिष्ठ सचिवों की समिति की बैठक में इन संशोधनों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान सचिवों ने प्रस्तावित बदलावों में कुछ महत्वपूर्ण सुधार के सुझाव दिए हैं। इन संशोधित प्रस्तावों को एक बार फिर समिति के समक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए इसे कैबिनेट को भेजा जाएगा।
रूट और स्टॉपेज होंगे तय, निजी ऑपरेटरों पर कसेगा शिकंजा
विभागीय सूत्रों के अनुसार, परिवहन अधिनियम के तहत नियमों में बदलाव का मुख्य उद्देश्य शहरों और गांवों में वाहनों के रूट और स्टॉपेज को व्यवस्थित करना है। राज्य परिवहन निगम (MPSRTC) के बंद होने के बाद से अंतर-राज्यीय और स्थानीय बसों का संचालन पूरी तरह से निजी ऑपरेटरों के हाथों में है। लंबे समय से इन नियमों में कोई संशोधन नहीं होने के कारण संचालन में मनमानी की शिकायतें मिल रही थीं। नए नियमों के लागू होने से वाहनों की आवाजाही पर सरकार का बेहतर नियंत्रण होगा और रूट तय होने से यात्रियों की मुश्किलें कम होंगी।
आम जनता को सुलभ और सुरक्षित सफर का मिलेगा लाभ
इन संशोधनों का सीधा लाभ आम आदमी को मिलेगा। सरकार का प्रयास है कि ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों को मुख्य शहरों से जोड़ा जाए। नियमों में बदलाव के बाद निजी ऑपरेटरों की जवाबदेही तय होगी, जिससे अवैध स्टॉपेज और निर्धारित रूट से भटकने वाली बसों पर लगाम लगेगी। सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद इस नई व्यवस्था को पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाएगा।