राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए एक गहरे खुले गड्ढे में बाइक सवार एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान पालम क्षेत्र के निवासी कमल के रूप में हुई है। यह हादसा गुरुवार देर रात हुआ, जिसमें युवक रोहिणी से अपने दफ्तर से घर लौटते समय अंधेरे में गड्ढे में जा गिरा।
परिवार के अनुसार, कमल रात में लापता हो गया था। जब वह तय समय तक घर नहीं पहुंचा, तो परिजन चिंतित होकर उसकी तलाश में निकल पड़े। उन्होंने जनकपुरी, रोहिणी, मंगोलपुरी, सागरपुर, विकासपुरी सहित कई थानों के चक्कर काटे, लेकिन पुलिस ने रात में शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया और मोबाइल लोकेशन ट्रेसिंग के आधार पर सिर्फ इतना बताया कि युवक जनकपुरी के 200 मीटर के दायरे में है। परिवार का दावा है कि कमल रात भर गड्ढे में तड़पता रहा, लेकिन कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची। सुबह करीब 6:30-7 बजे पुलिस ने फोन कर शव मिलने की सूचना दी। मौके पर पहुंचकर परिजनों ने देखा कि कमल अपनी बाइक के साथ गड्ढे में गिरा हुआ था।
परिजनों ने गुस्से में आरोप लगाया कि गड्ढे के आसपास न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। हादसे के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में मौके पर पर्दा लगा दिया। परिवार ने दिल्ली जल बोर्ड और पुलिस की लापरवाही को मौत का जिम्मेदार ठहराया है। कुछ परिजनों ने यहां तक आशंका जताई कि यह हादसा नहीं, बल्कि कोई साजिश हो सकती है।
यह घटना हाल ही में ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की खुले गड्ढे में गिरने से हुई मौत से मिलती-जुलती है, जिसने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निर्माण कार्यों में लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद (जिनका यह विधानसभा क्षेत्र है) ने घटनास्थल पर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं तथा कहा है कि दिल्ली जल बोर्ड या संबंधित एजेंसियों की ओर से हुई किसी भी चूक के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर शाम तक रिपोर्ट मांगी है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य सबूतों की जांच कर रही है। इस घटना ने दिल्ली की सड़कों पर निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।