मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद बुधवार को भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ भाजपा की नेमचा किपगेन (कुकी समुदाय से) और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के एल. दिखो (लोसी दिखो) ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथ समारोह इंफाल के लोक भवन में हुआ, जबकि नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली के मणिपुर भवन से वर्चुअल रूप से शपथ ली।
शपथ ग्रहण के महज एक दिन बाद गुरुवार शाम करीब 6 बजे चुराचांदपुर के तुइबोंग मेन मार्केट क्षेत्र में सैकड़ों युवा सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी नए उपमुख्यमंत्रियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करने लगे। उन्होंने सड़क पर टायर जलाकर आवागमन पूरी तरह रोक दिया। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों की उग्रता बढ़ गई। जवानों को कुछ देर के लिए पीछे हटना पड़ा और बाद में आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
यह विरोध मुख्य रूप से कुकी-जो समुदाय से जुड़ा है, जहां नेमचा किपगेन सहित कुछ कुकी विधायकों (जैसे एलएम खाउते और नगुरसंगलुर सनाते) के सरकार में शामिल होने से नाराजगी है। समुदाय के संगठनों का कहना है कि 2023 से जारी जातीय हिंसा में हुए नुकसान, विस्थापन और अन्य मुद्दों के समाधान के बिना सरकार में भागीदारी समुदाय की भावनाओं के खिलाफ है। कुकी संगठनों ने पहले ही विधायकों को चेतावनी दी थी कि वे सरकार में न शामिल हों।
कुकी-जो काउंसिल (KZC) ने ऐसे विधायकों का सामाजिक बहिष्कार घोषित कर दिया है। ज्वाइंट फोरम ऑफ सेवन (JF-7) जैसे संगठनों ने शुक्रवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कुकी-जो बहुल इलाकों में पूर्ण बंद का आह्वान किया है। संगठनों ने सख्त चेतावनी दी है कि समुदाय की भावनाओं का उल्लंघन करने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
हालात को नियंत्रित करने के लिए असम राइफल्स, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च चलाए जा रहे हैं। राज्य में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जारी जातीय तनाव के बीच यह नई अशांति चिंता का विषय बनी हुई है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसी भी तरह की अतिरिक्त हिंसा को रोकने के प्रयास जारी हैं।