नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति प्रदान की है। समिट के दौरान गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई ने भावुक अंदाज में भारत लौटने की खुशी जताई। उन्होंने कहा, “भारत आकर हर बार बहुत अच्छा लगता है। बदलाव की गति आश्चर्यजनक है।” अपने छात्र दिनों की याद करते हुए पिचाई ने चेन्नई से आईआईटी खड़गपुर तक कोरोमंडल एक्सप्रेस की यात्रा का जिक्र किया और विशाखापत्तनम को उस समय एक शांत तटीय शहर बताया। उन्होंने घोषणा की कि आज उसी विशाखापत्तनम में गूगल 15 बिलियन डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के तहत फुल-स्टैक एआई हब विकसित कर रहा है, जिसमें गीगावाट स्केल कंप्यूटिंग और नया इंटरनेशनल सब-सी केबल गेटवे शामिल होगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के डिजिटल परिवर्तन की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दस साल पहले मुंबई का एक स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता नहीं खोल पाता था, लेकिन आज वही व्यक्ति मोबाइल फोन से डिजिटल भुगतान प्राप्त कर रहा है। मैक्रों ने ‘इंडिया स्टैक’ को ओपन, इंटरऑपरेबल और संप्रभु डिजिटल मॉडल करार दिया। उन्होंने भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल आइडेंटिटी, प्रतिमाह 20 अरब ट्रांजेक्शन प्रोसेस करने वाला पेमेंट सिस्टम और 50 करोड़ डिजिटल हेल्थ आईडी, ये सब वैश्विक स्तर पर मिसाल हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस समिट को ग्लोबल साउथ का अब तक का सबसे बड़ा एआई सम्मेलन बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विजन पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक को लोकतांत्रिक बनाना और उसके लाभ हर नागरिक तक पहुंचाना उनका लक्ष्य है। वैष्णव ने जोर दिया कि तकनीक की असली कीमत तब है, जब वह आम लोगों के जीवन को सरल और बेहतर बनाए।
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत एआई को लेकर बेहद आशावादी राष्ट्र है। उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम का जिक्र करते हुए बताया कि यह ढांचा 1.4 अरब लोगों को जोड़कर भारत की डिजिटल शक्ति का प्रमाण है।