इजराइल ने तेहरान के तेल डिपो पर हमला किया, भीषण आग लगी

अमेरिका और इजराइल के संयुक्त अभियान के नौवें दिन इजराइली वायुसेना ने तेहरान और पड़ोसी अल्बोर्ज प्रांत (जिसमें कराज शहर शामिल है) में ईरान के कई ईंधन भंडारण केंद्रों पर हवाई हमले किए। इन हमलों से बड़े पैमाने पर आग लग गई, आसमान में काला धुआं छा गया और शहर में विस्फोटों की आवाजें गूंजीं। यह संघर्ष में पहली बार ईरान की ऊर्जा सुविधाओं को सीधे निशाना बनाया गया है।

इजराइली रक्षा बलों (IDF) ने पुष्टि की कि हमले उन ईंधन भंडारण परिसरों पर किए गए जो ईरानी सेना और अन्य सैन्य इकाइयों को ईंधन सप्लाई करते हैं। IDF के बयान में कहा गया कि ये ठिकाने मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने में इस्तेमाल हो रहे थे, और हमलों से ईरानी सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि तेहरान के सबसे बड़े रिफाइनरी क्षेत्र में करीब 30 बड़े तेल टैंक प्रभावित हुए।

ईरान के तेल मंत्रालय ने स्वीकार किया कि तेहरान और अल्बोर्ज प्रांतों में कई तेल भंडारण डिपो और पेट्रोलियम उत्पाद ट्रांसफर सेंटरों को निशाना बनाया गया। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, हमलों में कम से कम चार टैंकर ड्राइवरों की मौत हुई। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि ईंधन वितरण व्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और आग बुझाने के प्रयास जारी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में तेहरान के आसपास लाल-नारंगी लपटें और घना धुआं दिख रहा है, जिससे शहर में काला बारिश जैसी स्थिति बनी हुई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये हमले ईरानी शासन को अस्थिर करने और बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने आगे कहा कि और अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया जाएगा।

ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर फिर से ईरान से ‘अनकंडीशनल सरेंडर’ की मांग की। उन्होंने लिखा, “ईरान के साथ कोई डील नहीं, सिर्फ अनकंडीशनल सरेंडर!” ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान नहीं माना तो उसे “बहुत जोरदार” हमलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने पहले भी कहा था कि ईरान तब तक लड़ने लायक नहीं बचेगा जब तक उसके पास न संसाधन रहेंगे और न ही लोग, और उसके बाद ही नए नेतृत्व के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

पृष्ठभूमि और प्रभाव

यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ, जिसमें अब तक ईरान के मिसाइल ठिकानों, कमांड सेंटरों और अन्य सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया जा चुका है। ईरान ने जवाबी हमलों में खाड़ी देशों और इजराइल पर मिसाइल दागे हैं। तेल भंडारण पर हमलों से ईरान की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है, जबकि वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने समर्पण से इनकार करते हुए कहा कि उनका देश कभी नहीं झुकेगा।