राज्यसभा में LPG हंगामा: खड़गे बोले- पहले से पता था तो इंतजाम क्यों नहीं?

बजट सत्र के दूसरे चरण में सोमवार को राज्यसभा में एलपीजी सिलेंडर की कमी और संकट को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शून्यकाल में मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण होने वाले संकट की जानकारी सरकार को पहले से थी, फिर भी वैकल्पिक व्यवस्था या पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की गई?

खड़गे ने सदन में कहा कि पेट्रोलियम मंत्री ने लोकसभा में दावा किया था कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। कई जगहों पर घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे ढाबों, रेस्टोरेंटों, होटलों और हॉस्टलों में सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, जिससे आम जनता और छोटे व्यापारियों को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत आपूर्ति होरमुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। इस जलमार्ग पर तनाव के कारण आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे देशव्यापी हाहाकार मचा हुआ है। कई इलाकों में कालाबाजारी बढ़ गई है और वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमतें 5,000 रुपये से अधिक पहुंच गई हैं।

विपक्षी नेता ने मांग की कि सरकार तत्काल कदम उठाए, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करे और सदन में पूर्ण चर्चा कराए। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने भारतीय नागरिकों को ईरान में सतर्क रहने की सलाह दी थी, तब ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी अलर्ट होना चाहिए था।

भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खड़गे के बयान का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष आपदा के समय भी राजनीति कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता में डर फैला रही है और अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने मंत्री के बयान को ठीक से नहीं सुना। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि स्थिति नियंत्रण में है और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए आपूर्ति बढ़ाई जा रही है।

लोकसभा में शांतिपूर्ण माहौल

इसके विपरीत, लोकसभा में सोमवार को प्रश्नकाल बिना किसी व्यवधान के पूरा हुआ। स्पीकर ओम बिरला के निर्देश पर विपक्ष को दोपहर बाद मुद्दे उठाने का अवसर मिला, जिससे सदन सुचारू रूप से चला। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य मंत्री सांसदों के सवालों का जवाब देते रहे। सत्र के पहले हफ्ते में हंगामे के कारण प्रश्नकाल प्रभावित रहा था, लेकिन आज शांतिपूर्ण ढंग से चला।

संकट की वजह और प्रभाव

पश्चिम एशिया में ईरान के साथ तनाव बढ़ने से होरमुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ा है। घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के प्रयास हुए हैं, लेकिन मांग और आपूर्ति में असंतुलन से पैनिक खरीदारी और कालाबाजारी बढ़ी है। छोटे व्यवसाय बंद होने लगे हैं, जबकि आम परिवारों में चिंता है।