केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर हुए युवा प्रदर्शन को लेकर साफ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उस दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कोई गोली नहीं चलाई गई। हजारों लोगों की भीड़ होने के बावजूद किसी प्रदर्शनकारी को गंभीर चोट नहीं पहुंची और किसी की हड्डी भी नहीं टूटी।
रिजिजू ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन की तारीफ करते हुए बताया कि इतने बड़े पैमाने के आंदोलन को बिना किसी मौत या गंभीर चोट के संभाल लिया गया। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और पूछा कि जब गोली चली ही नहीं तो यह सवाल कैसे उठ सकता है। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय गोलीबारी से कई मौतें हुई थीं, जबकि इस बार स्थिति पूरी तरह नियंत्रित रही।
युवाओं से संवाद जरूरी
रिजिजू ने जेन-जी युवाओं के बारे में कहा कि ये हमारे ही बच्चे हैं। उनके साथ जुड़ाव में कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय समाज में पारिवारिक मूल्य मजबूत हैं और युवाओं से बड़ों की बात सुनने की अपेक्षा रहती है। फिर भी उनकी बातें सुनना और उन्हें समझाना दोनों जरूरी है। लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताएं सही हैं, लेकिन कुछ राजनीतिक दल आंदोलन को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, जो ठीक नहीं है।
अभिजीत दीपके पर टिप्पणी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का जिक्र करते हुए रिजिजू ने सवाल उठाया कि वे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं, फिर छात्र नेता कैसे बन गए। उन्होंने कहा कि दीपके महाराष्ट्र से हैं और पहले AAP से जुड़े रहे हैं। छात्रों की जायज मांगों पर सरकार बात करने को तैयार है, लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा युवा आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।