गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है। यह भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और शुभ कार्यों के आरंभकर्ता माना जाता है। 2026 में यह पर्व 14 सितंबर को मनाया जा रहा है।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह उत्सव शुरू होता है। घर-घर में गणेश जी की मिट्टी या पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की स्थापना की जाती है। लोग भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करते हैं, आरती गाते हैं और प्रसाद के रूप में मोदक चढ़ाते हैं। गणेश जी को मोदक बहुत प्रिय हैं।
यह त्योहार सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव भी है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और कई अन्य राज्यों में बड़े पंडाल लगाए जाते हैं। संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा माहौल उत्साह से भर जाता है। लोग “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।
उत्सव आमतौर पर डेढ़ दिन से लेकर दस दिनों तक चलता है। अंत में अनंत चतुर्दशी के दिन मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है।